गाजियाबाद में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट का बड़ा खुलासा! 20 साल में बने 28 हजार प्रमाण पत्र जांच में, खतरे में हजारों सरकारी नौकरियां

Edited By Anil Kapoor,Updated: 31 Jan, 2026 01:36 PM

major scam involving fake disability certificates uncovered in ghaziabad

Ghaziabad News: सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने वालों पर अब स्वास्थ्य विभाग सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। शासन के निर्देश पर पिछले करीब 20 वर्षों में जारी लगभग 28 हजार दिव्यांग सर्टिफिकेट की दोबारा जांच...

Ghaziabad News: सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने वालों पर अब स्वास्थ्य विभाग सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। शासन के निर्देश पर पिछले करीब 20 वर्षों में जारी लगभग 28 हजार दिव्यांग सर्टिफिकेट की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जिन लोगों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे, उनकी नौकरी खत्म की जा सकती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

किस तरह के मामलों पर ज्यादा नजर
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा शिकायतें आंख, कान और नाक की बीमारी बताकर दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर मिली हैं। इसलिए इन मामलों की मेडिकल टीम विशेष रूप से बारीकी से जांच करेगी। इसके लिए विभाग ने नोडल अधिकारी अनवर अंसारी की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित की है।

जांच कैसे होगी?
वर्ष 2005 के बाद बने सभी सर्टिफिकेट की समीक्षा की जा रही है। वर्ष 2015 के बाद बने ऑनलाइन प्रमाण पत्रों की भी जांच होगी। मेडिकल रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड की संस्तुति और दस्तावेजों की सत्यता देखी जाएगी। कम दिखाई देना, कम सुनाई देना, बोलने में दिक्कत, दुर्घटना के बाद विकलांगता और मानसिक रोग से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

फर्जीवाड़े का तरीका क्या था?
अधिकारियों के अनुसार, कई शिकायतों में पाया गया कि 33% दिव्यांगता होने के बावजूद 50–55% दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवा लिया गया, ताकि सरकारी नौकरी और योजनाओं का लाभ मिल सके।

प्रमाण पत्र कैसे जारी होता है?
हर सोमवार जिला अस्पताल में मेडिकल बोर्ड की टीम जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी करती है। इसमें शामिल होते हैं:
- मानसिक रोग विशेषज्ञ
- नेत्र रोग विशेषज्ञ
- हड्डी रोग विशेषज्ञ
- ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञ
- जनरल फिजिशियन
- हेड डॉक्टर
इसी प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है।

फर्जी पाए जाने पर क्या होगा?
यदि जांच में कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी या सरकारी लाभ लेता पाया गया, तो नौकरी समाप्त की जा सकती है। मुकदमा दर्ज होगा, कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम वास्तविक दिव्यांगों का हक सुरक्षित रखने के लिए उठाया जा रहा है।

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