BJP में बगावत! 'पार्टी भटक रही है' कहकर 20 नेताओं का सामूहिक इस्तीफा, अंदर ही अंदर क्या चल रहा है?

Edited By Anil Kapoor,Updated: 29 Jan, 2026 11:18 AM

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Mau News: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध देखने को मिल रहा है। अब इस मुद्दे की आंच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर भी पहुंचती दिख रही है। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पार्टी के 20 पदाधिकारियों और......

Mau News: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध देखने को मिल रहा है। अब इस मुद्दे की आंच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर भी पहुंचती दिख रही है। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पार्टी के 20 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वालों में एक सेक्टर अध्यक्ष, चार बूथ अध्यक्ष और अन्य कार्यकर्ता शामिल हैं। सभी ने अपना इस्तीफा जिला बीजेपी अध्यक्ष को सौंपा। इसे स्थानीय स्तर पर पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

झंडा जलाने का आरोप
बताया जा रहा है कि नाराज कार्यकर्ताओं ने विरोध के दौरान पार्टी का झंडा भी जलाया। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या पार्टी की ओर से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

इस्तीफा देने वालों ने क्या कहा?
मऊ के सेक्टर 356 के अध्यक्ष राम सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि UGC नियमों में बदलाव युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांतों से पार्टी दूर होती जा रही है। इसी वजह से उन्होंने अपने पद से हटने का फैसला लिया। उनके साथ चार बूथ अध्यक्ष और 14 अन्य कार्यकर्ताओं ने भी इस्तीफा दिया।

क्या हैं UGC के नए नियम?
UGC ने 13 जनवरी को कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अगर किसी SC, ST या OBC वर्ग के छात्र के साथ भेदभाव होता है, तो वह शिकायत कर सकता है। संस्थान को एक महीने के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

विरोध क्यों हो रहा है?
कुछ संगठनों और लोगों का कहना है कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। उनका तर्क है कि झूठी शिकायतों से निर्दोष छात्रों को परेशानी हो सकती है। साथ ही उनका कहना है कि झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ स्पष्ट दंड प्रावधान नहीं है। वहीं, नियमों के समर्थकों का कहना है कि यह कदम शिक्षा संस्थानों में समानता और सुरक्षित माहौल बनाने के लिए जरूरी है।

राजनीतिक असर
मऊ में हुए सामूहिक इस्तीफों को स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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