Edited By Anil Kapoor,Updated: 31 Jan, 2026 12:56 PM

Ayodhya News: अयोध्या में नाबालिग लड़की से गैंगरेप के मामले में अदालत ने सपा नेता मोईद खान को बरी कर दिया है, जबकि दूसरे आरोपी राजू खान को 20 साल की सजा सुनाई गई है। मोईद खान को घटना के समय मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया गया था, लेकिन अदालत...
Ayodhya News: अयोध्या में नाबालिग लड़की से गैंगरेप के मामले में अदालत ने सपा नेता मोईद खान को बरी कर दिया है, जबकि दूसरे आरोपी राजू खान को 20 साल की सजा सुनाई गई है। मोईद खान को घटना के समय मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया गया था, लेकिन अदालत ने पुलिस जांच और सबूतों के आधार पर उसे बरी कर दिया।
मामला कब और कैसे हुआ?
घटना 29 जुलाई 2024 को अयोध्या के पूराकलंदर इलाके में हुई थी। पीड़िता ने इस मामले में पोक्सो और गैंगरेप की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में मोईद खान और उसकी बेकरी में काम करने वाले राजू खान को आरोपी बनाया गया।
पुलिस जांच और बयानों में विरोधाभास
पीड़िता ने पहले बयान में राजू के साथ “मोहित” नाम लिया, लेकिन बाद में कहा कि असली आरोपी मोईद खान है। पुलिस ने मोहित को तलाशने की कोशिश नहीं की। घटनास्थल के बारे में भी बयानों में फर्क था। पहले पीड़िता ने खेत के पास चिलबिल के पेड़ के नीचे बताया, जबकि अदालत में कहा कि मोईद की बेकरी के पीछे कमरे में घटना हुई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि राजू ने मोबाइल पर उसका वीडियो बनाया, लेकिन फॉरेंसिक जांच में मोबाइल में कोई वीडियो नहीं मिला। मोईद खान की शारीरिक बनावट और डीएनए भी केस में शामिल नहीं हुआ।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में विरोधाभास, डीएनए मैच न होना, घटना स्थल और मोबाइल लोकेशन का मिलान नहीं होना। इन कारणों से मोईद खान को बरी कर दिया गया। वहीं, राजू खान का डीएनए मैच और सबूत मिलने के कारण उसे 20 साल की सजा सुनाई गई।
पुलिस जांच पर उठे सवाल
- कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन की जांच नहीं की गई।
- घटनास्थल के नक्शे का मिलान आरोपी के मोबाइल से नहीं कराया गया।
- पहले बयान में 'मोहित' के नाम को अनदेखा किया गया।
- अदालत ने मामले की सतही विवेचना होने का भी जिक्र किया।