युवा हो रहे Monkey Fever का शिकार, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क, ज़रा सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा!

Edited By Purnima Singh,Updated: 04 Feb, 2026 04:09 PM

young people are falling prey to monkey fever

Monkey Fever : कर्नाटक में मंकी फीवर (क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज—KFD) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में उडुपी जिले के एक अस्पताल में 29 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद इस घातक बीमारी को लेकर सतर्कता और तेज कर दी...

Monkey Fever : कर्नाटक में मंकी फीवर (क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज—KFD) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में उडुपी जिले के एक अस्पताल में 29 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद इस घातक बीमारी को लेकर सतर्कता और तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, समय पर पहचान होने पर यह बीमारी आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में अचानक गंभीर रूप ले सकती है।

अचानक बिगड़ी मृतक की तबीयत (Monkey Fever)
स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर गुरुदत्ता हेगड़े ने बताया कि मृतक युवक तिरथहल्ली तालुक का निवासी था। 28 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के एक दिन के भीतर ही मंकी फीवर की पुष्टि हो गई थी। शुरुआती दिनों में उसकी हालत स्थिर थी, लेकिन बाद में अचानक तबीयत बिगड़ गई और उसे बचाया नहीं जा सका। अधिकारियों ने इस मामले को असामान्य बताया है।

क्या है मंकी फीवर?
मंकी फीवर को चिकित्सकीय भाषा में क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) कहा जाता है। यह एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है। कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और केरल के कुछ हिस्सों में इसके मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। यह बीमारी तेज बुखार और कमजोरी के साथ शुरू होती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है।

यह भी पढ़ें : बेहद दुखद खबर: क्रिकेट जगत को बड़ा सदमा, पूर्व क्रिकेटर का 67 साल की उम्र में निधन, कभी मैच के लिए टाल दी थी अपनी शादी!

कैसे फैलता है संक्रमण?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मंकी फीवर सीधे बंदरों से इंसानों में नहीं फैलता। इसका मुख्य कारण एक खास किस्म का जंगली टिक (कीड़ा) हेमाफिसैलिस स्पिनिगेरा है। संक्रमित टिक के काटने से इंसान बीमार पड़ सकता है। इसके अलावा संक्रमित गिलहरी, चूहे या मृत बंदरों के संपर्क में आने से भी खतरा रहता है। राहत की बात यह है कि यह बीमारी इंसान से इंसान में नहीं फैलती।

किस मौसम में खतरा ज्यादा?
मंकी फीवर के मामले आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होकर अप्रैल तक बढ़ते हैं। जनवरी से मार्च के बीच इसका प्रकोप सबसे अधिक देखा जाता है।

किन लोगों को ज्यादा जोखिम?
जंगलों में काम करने वाले मजदूर, लकड़ी काटने वाले, चरवाहे और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग इस बीमारी के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। बिना सुरक्षा जानवरों को संभालने वालों में भी खतरा अधिक रहता है।

यह भी पढ़ें : Munawwar Rana की बेटी को Triple Talaq देकर पति ने घर से निकाला, गाली-गलौज और बेरहमी से मारपीट भी की, दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज

लक्षण कैसे पहचानें?
संक्रमण के 3 से 8 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआती लक्षण में तेज बुखार, ठंड लगना, तेज सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द होता है। वहीं बीमारी बढ़ने पर नाक, मसूड़ों और गले से खून आने लगता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर कम होना, प्लेटलेट्स में गिरावट जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं। वहीं गंभीर मामलों में उल्टी और मितली, मानसिक भ्रम, हाथ-पैर कांपना, नजर कमजोर होना शामिल हैं। 

कितनी खतरनाक है बीमारी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मंकी फीवर की मृत्यु दर 2 से 10 प्रतिशत के बीच होती है। समय रहते इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें : S*EX पावर बढ़ाने के लिए पति खाता था सेक्सवर्धक गोलियां! चरम सुख पाने के लिए हर हद कर देता था पार, एक दिन बदल गई पत्नी की नियत, फिर जो हुआ....

इलाज और बचाव
फिलहाल इस बीमारी का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। मरीज को सपोर्टिव ट्रीटमेंट दिया जाता है, जिसमें आईवी फ्लूइड, खून बहने पर नियंत्रण, आराम और पोषणयुक्त आहार शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। जंगलों में जाते समय शरीर को पूरी तरह ढककर रखें, टिक से बचाव के उपाय अपनाएं और बीमार या मरे हुए जानवरों के संपर्क से बचें। बुखार या असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं।

डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!