Edited By Ramkesh,Updated: 03 Feb, 2026 01:24 PM
एमएस धोनी के शहर रांची से प्रयागराज पहुंचे एक युवक इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बने हुए हैं। न कोई राजनीतिक पहचान, न किसी संगठन का बैनर—पहचान है तो सिर्फ मां गंगा के प्रति निस्वार्थ सेवा की। यह नाम है मिश्री गोस्वामी, जिन्हें अब लोग सम्मान से ‘गंगा...
प्रयागराज (सैय्यद आकिब रजा): एमएस धोनी के शहर रांची से प्रयागराज पहुंचे एक युवक इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बने हुए हैं। न कोई राजनीतिक पहचान, न किसी संगठन का बैनर—पहचान है तो सिर्फ मां गंगा के प्रति निस्वार्थ सेवा की। यह नाम है मिश्री गोस्वामी, जिन्हें अब लोग सम्मान से ‘गंगा पुत्र’ कहकर पुकारने लगे हैं।

बिना किसी सरकारी सहायता गंगा की सफाई में जुटे हैं मिश्री गोस्वामी
महाकुंभ के बाद माघ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण गंगा घाटों पर गंदगी बढ़ गई है। पूजा-सामग्री, प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य कचरा गंगा की पवित्र धारा को दूषित कर रहा है। ऐसे में मिश्री गोस्वामी रोज सुबह घाटों पर पहुंचते हैं और बिना किसी सरकारी सहायता या प्रचार के गंगा की सफाई में जुट जाते हैं। हाथ में झाड़ू और थैला लिए वह घाटों से कचरा उठाते हैं और लोगों को स्वच्छता का संदेश देते हैं।

“गंगा केवल आस्था नहीं, जीवन हैं
मिश्री गोस्वामी का कहना है,“गंगा केवल आस्था नहीं, जीवन हैं। अगर पूजा के बाद हम गंदगी छोड़ देंगे तो यह भक्ति नहीं, सिर्फ दिखावा है।” उनकी यह सोच और समर्पण अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भी प्रेरित कर रहा है। कई लोग उनके सफाई अभियान के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, तो कई युवा उनके साथ जुड़कर गंगा सेवा में हाथ बंटा रहे हैं।

गंगा की सेवा को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं गोस्वामी
पंजाब केसरी से खास बातचीत में मिश्री गोस्वामी ने बताया कि वह पेशे से सब्जी विक्रेता हैं। जब भी देश का सबसे बड़ा धार्मिक मेला प्रयागराज में लगता है, वह गंगा की सेवा को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्य में उन्हें अपने परिवार का पूरा सहयोग मिलता है। उनकी पत्नी और तीन बच्चे उनके इस सेवा भाव को समझते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं।
गंगा की सेवा मानसिक शांति और सुकून देती है
मिश्री गोस्वामी का मानना है कि गंगा की सेवा उन्हें मानसिक शांति और सुकून देती है। आज प्रयागराज में उनका नाम सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सोच और संदेश का प्रतीक बन चुका है—कि असली धर्म भाषणों में नहीं, बल्कि कर्म में होता है। यही कारण है कि संगम नगरी में हर जुबां पर अब एक ही नाम है—‘गंगा पुत्र’ मिश्री गोस्वामी।