Edited By Anil Kapoor,Updated: 28 Jan, 2026 11:30 AM

Bulandshahr News: बुलंदशहर जिले में प्रसव के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक आशा कार्यकर्ता ने कमीशन के लालच में गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय एक निजी अनधिकृत दाई के पास......
Bulandshahr News: बुलंदशहर जिले में प्रसव के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक आशा कार्यकर्ता ने कमीशन के लालच में गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय एक निजी अनधिकृत दाई के पास भेज दिया, जहां प्रसव के दौरान जटिल स्थिति बन गई और नवजात की मौत हो गई। महिला की हालत भी बिगड़ गई। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
घटना जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव रूठा की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उन्होंने आशा कार्यकर्ता रूपवती से संपर्क किया। आरोप है कि उसने सरकारी अस्पताल के बजाय बेहतर इलाज का भरोसा देकर महिला को नई बस्ती में रहने वाली एक झोलाछाप दाई के पास पहुंचाया। प्रसव के दौरान स्थिति बिगड़ गई। परिवार का कहना है कि उचित चिकित्सा सुविधा और प्रशिक्षित स्टाफ न होने से गंभीर जटिलता पैदा हुई, जिससे नवजात की जान नहीं बचाई जा सकी और प्रसूता की हालत भी नाजुक हो गई।
साक्ष्य छिपाने की कोशिश का आरोप
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थिति बिगड़ने के बाद आशा कार्यकर्ता और दाई वहां से चले गए। ग्रामीणों के इकट्ठा होने पर मामला खुला। इसके बाद परिवार ने महिला को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर इलाज किया। महिला की स्थिति अब भी चिंताजनक बताई जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई
घटना से नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने विरोध जताया। सीओ अनूपशहर विकास चौहान ने बताया कि आशा कार्यकर्ता और कथित दाई के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। वहीं यह मामला ग्रामीण इलाकों में अनधिकृत प्रसव केंद्रों और कमीशन के खेल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है।