Edited By Anil Kapoor,Updated: 03 Feb, 2026 10:49 AM

Agra News: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा गांव है, जहां कुछ परिवारों को अपने प्रियजनों को घर के अंदर ही दफनाना पड़ता है। वजह कोई परंपरा नहीं, बल्कि कब्रिस्तान की जमीन का अभाव बताया......
Agra News: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा गांव है, जहां कुछ परिवारों को अपने प्रियजनों को घर के अंदर ही दफनाना पड़ता है। वजह कोई परंपरा नहीं, बल्कि कब्रिस्तान की जमीन का अभाव बताया जा रहा है।
कहां है यह गांव?
यह गांव आगरा से करीब 30 किलोमीटर दूर, किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित छह पोखर गांव है। बाहर से देखने पर यह गांव सामान्य लगता है, लेकिन अंदर की स्थिति लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है।
हर घर में किसी अपने की कब्र
गांव में करीब 15 मुस्लिम परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में उनका कोई आधिकारिक कब्रिस्तान नहीं है। ऐसे में जब किसी की मौत होती है तो परिवारों के पास कोई और विकल्प नहीं बचता और वे अपने घर के अंदर ही दफन कर देते हैं। कुछ घरों में पत्नी, बच्चे या माता-पिता की कब्रें बनी हुई हैं। एक ही छत के नीचे जिंदगी और मौत साथ मौजूद हैं।
रसोई के पास कब्र, वहीं खेलते बच्चे
ग्रामीणों के मुताबिक, घरों में जहां एक ओर चूल्हा जलता है, वहीं पास में कब्र भी बनी होती है। बच्चे उसी आंगन में खेलते हैं, जहां उनके किसी परिजन की अंतिम विश्राम स्थली है। लोग रोजमर्रा की जिंदगी इसी माहौल में जीने को मजबूर हैं।
मजबूरी, ना कि परंपरा
गांव वालों का कहना है कि यह कोई धार्मिक रिवाज या परंपरा नहीं है। वे बताते हैं कि “अगर दफनाने की जगह ही न हो, तो इंसान क्या करे? हम जमीन के मालिक नहीं हैं, गांव में हमारे लिए कब्रिस्तान नहीं है।” ग्रामीणों की आंखों में यह बात कहते समय दर्द साफ झलकता है।
सबसे बड़ा सवाल
यह मामला एक बड़े सवाल को जन्म देता है — क्या इन परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए दो गज जमीन भी नसीब नहीं हो पाएगी? छह पोखर गांव के लोग इसी समस्या के साथ जीवन बिता रहे हैं। यहां जन्म, जीवन और मृत्यु — तीनों एक ही घर की चारदीवारी के भीतर सिमट गए हैं।