Prayagraj News: माघ मेले में पहुंचा "गोल्डन ब्वॉय" श्रद्धालुओं के बीच बना आकर्षण का केंद्र

Edited By Ramkesh,Updated: 06 Jan, 2026 07:28 PM

the golden boy arrived at the magh mela becoming a center of attraction for

माघ मेले की रौनक में इस बार एक ऐसी कहानी गूंज रही है, जो भीड़ के शोर में भी दिल को चुप करा देती है। यह कहानी है ‘गोल्डन ब्वॉय’ भानु प्रताप की—एक ऐसे बच्चे की, जिसने बचपन में ही जिंदगी का सबसे भारी बोझ उठा लिया।

प्रयागराज ( सैय्यद आकिब रजा): प्रयागराज के माघ मेले की रौनक में इस बार एक ऐसी कहानी गूंज रही है, जो भीड़ के शोर में भी दिल को चुप करा देती है। यह कहानी है ‘गोल्डन ब्वॉय’ भानु प्रताप की—एक ऐसे बच्चे की, जिसने बचपन में ही जिंदगी का सबसे भारी बोझ उठा लिया।

भानु प्रताप की दुनिया उस दिन उजड़ गई, जब मां और पिता दोनों का साया एक-एक कर सिर से उठ गया। अचानक वह और उसका छोटा भाई अनाथ हो गए। जिस उम्र में बच्चे मां की गोद और पिता की उंगली थामकर चलना सीखते हैं, उसी उम्र में भानु ने खुद को मजबूत करने की कसम खा ली। उसने फैसला किया कि अब वह सिर्फ भाई नहीं रहेगा—वह पिता भी बनेगा, मां भी।

छोटे भाई की भूख, उसकी पढ़ाई, उसके कपड़े, उसकी सुरक्षा—हर जिम्मेदारी भानु के कंधों पर आ गिरी। कई रातें ऐसी थीं जब खुद खाली पेट सोकर भाई को भरपेट खिलाया। कई बार आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर मजबूरी की मुस्कान। स्कूल की फीस से लेकर रोज़ की जरूरतों तक—भानु ने कभी हार नहीं मानी। उसने मेहनत को अपना हथियार और सब्र को अपनी ढाल बना लिया।

आज वही भानु प्रताप माघ मेले में ‘गोल्डन ब्वॉय’ के नाम से पहचाना जा रहा है। लोग उसकी कहानी सुनते हैं, रुक जाते हैं। कोई सिर झुकाकर सलाम करता है, तो कोई आंखें पोंछता हुआ आगे बढ़ जाता है। भानु के संघर्ष में हर उस इंसान की झलक दिखती है, जिसने कभी हालात से हार मानने से इनकार किया हो। लेकिन इस कहानी की सबसे भावुक तस्वीर तब बनती है, जब भानु अपने छोटे भाई को देखते हुए मुस्कुराता है। उसकी आंखों में कोई शिकायत नहीं, सिर्फ सुकून है। वह कहता है—“अगर मेरा भाई पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बन गया, तो मेरी जिंदगी सफल हो गई।” शायद यही वह पल है, जहां भानु की पूरी तपस्या मुकम्मल होती है।

माघ मेले की भीड़ में भानु प्रताप कोई साधारण चेहरा नहीं। वह उन लाखों बच्चों की आवाज है, जो वक्त से पहले बड़े हो गए। वह याद दिलाता है कि मां-बाप सिर्फ जन्म नहीं देते, हालात भी इंसान को गढ़ते हैं। और जब मेले की रोशनी बुझ जाती है, तब भी भानु प्रताप का संघर्ष चमकता रहता है—सोने की तरह नहीं, बल्कि उस भरोसे की तरह, जो कहता है।  अगर इरादे मजबूत हों, तो अनाथपन भी हार मान लेता है।
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!