DNA टेस्ट ने खोला 74 साल पुराना राज! जिन रिश्तेदारों को महिला ने समझा था मरा — दुनिया भर में मिले 50 जिंदा परिजन

Edited By Anil Kapoor,Updated: 29 Jan, 2026 10:05 AM

viral news a dna test changed the life of a 74 year old woman

Viral News: आज के समय में तकनीक ने लोगों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है, खासकर जब बात बिछड़े परिवार को खोजने की हो। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली 74 साल की एड्रियाना टर्क की कहानी इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि......

Viral News: आज के समय में तकनीक ने लोगों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है, खासकर जब बात बिछड़े परिवार को खोजने की हो। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली 74 साल की एड्रियाना टर्क की कहानी इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक डीएनए टेस्ट उनकी पूरी जिंदगी बदल देगा। एड्रियाना के पिता जर्मन यहूदी थे। साल 1937 में वे हिटलर की नाजी सेना के डर से जर्मनी छोड़कर भाग गए थे। बचपन से ही एड्रियाना यही मानकर बड़ी हुईं कि उनके परिवार के बाकी सदस्य होलोकॉस्ट यानी नाजी नरसंहार में मारे जा चुके हैं। उनके पिता ने उन्हें बताया था कि अब उनका कोई रिश्तेदार जिंदा नहीं है। यही वजह थी कि एड्रियाना ने कभी अपने पुराने परिवार को खोजने की कोशिश नहीं की।

भाई की मौत के बाद बदला मन
दिसंबर 2024 में एड्रियाना के भाई जूलियन की मौत हो गई। इसके बाद उन्हें लगा कि वह दुनिया में बिल्कुल अकेली रह गई हैं। इसी दौरान उनके मन में अपने परिवार के इतिहास को जानने की इच्छा जगी। उन्होंने सोचा कि शायद उन्हें अपने अतीत के बारे में कुछ जानकारी मिल जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने MyHeritage कंपनी से अपना डीएनए टेस्ट करवाया। लेकिन जब रिपोर्ट आई, तो वे हैरान रह गईं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उनके 50 से ज्यादा रिश्तेदार आज भी अलग-अलग देशों में जिंदा हैं।

सालों से जो सच मानती थीं, वह निकला गलत
डीएनए रिपोर्ट से पता चला कि उनकी दादी के परिवार के तीन सदस्य नरसंहार के समय बच निकले थे। उन्हीं की आने वाली पीढ़ियां आज इजराइल और अन्य देशों में रह रही हैं। एड्रियाना को कई चचेरे भाई-बहन, मौसी और चाचा के बारे में पता चला। उन्हें सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब उनकी मुलाकात इजराइल में रहने वाले 73 साल के चचेरे भाई रानान गिद्रोन से हुई, जो पेशे से डॉक्टर हैं। एड्रियाना ने कहा कि वह हमेशा खुद को अकेला समझती थीं, लेकिन इस खोज ने उनके जीवन का खालीपन भर दिया।

परिवार ने झेला था नाजी अत्याचार
रानान की मां को नाजी दौर में खतरनाक कैंपों में रखा गया था। वह पहले थेरेजिएनस्टाट कैंप में थीं और बाद में ऑशविट्ज़ भेज दी गई थीं। किस्मत से वह बच गईं और बाद में नई जिंदगी शुरू की। रानान ने बताया कि उन्हें बस इतना पता था कि शायद ऑस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड में कुछ रिश्तेदार हो सकते हैं, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं थी।

उम्मीद की कहानी बनी यह मुलाकात
एड्रियाना और रानान की मुलाकात उस समय हुई जब दुनिया होलोकॉस्ट मेमोरियल डे मना रही थी — यह दिन उन लाखों लोगों की याद में मनाया जाता है जो नाजी अत्याचारों के शिकार हुए थे। एड्रियाना कहती हैं कि इतने सालों तक वह खुद को “गायब” महसूस करती थीं, लेकिन अब उन्हें लगता है कि उनके जीवन का खोया हिस्सा वापस मिल गया है। आज कई यहूदी परिवार डीएनए टेस्ट के जरिए अपने बिछड़े रिश्तेदारों को खोज पा रहे हैं। रानान का मानना है कि उनकी यह कहानी डर और नफरत के माहौल में उम्मीद का संदेश देती है — कि परिवार और इंसानी रिश्ते नफरत से कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं। अब एड्रियाना अपने नए मिले बड़े परिवार के साथ समय बिता रही हैं और उन रिश्तों को जी रही हैं, जिनके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था।

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