Meerut पुलिस का फर्जी IAS निकला असली अधिकारी! एक फोन कॉल ने बिगाड़ा खेल, खाकी की कार्यशैली पर उठे सवाल

Edited By Anil Kapoor,Updated: 18 Mar, 2026 12:58 PM

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Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक ऐसी गुत्थी उलझ गई है जिसने पुलिस प्रशासन और प्रशासनिक सेवाओं के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है। जिसे पुलिस ने फर्जी आईएएस (Fake IAS) बताकर गिरफ्तार किया, वह अब खुद को असली अधिकारी बताते हुए...

Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक ऐसी गुत्थी उलझ गई है जिसने पुलिस प्रशासन और प्रशासनिक सेवाओं के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है। जिसे पुलिस ने फर्जी आईएएस (Fake IAS) बताकर गिरफ्तार किया, वह अब खुद को असली अधिकारी बताते हुए सीना ठोककर सामने आ गया है। राहुल कौशिक नामक इस व्यक्ति के दावों और पेश किए गए दस्तावेजों ने मेरठ पुलिस को बैकफुट पर धकेल दिया है।

क्या था पुलिस का दावा?
12 मार्च को मेरठ पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि उन्होंने राहुल कौशिक नाम के एक जालसाज को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार, राहुल खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को धमकाता था और बड़े अधिकारियों को फोन कर गुमराह करता था। पुलिस ने इसे अपनी बड़ी कामयाबी बताते हुए राहुल को सलाखों के पीछे भेज दिया था।

दस्तावेजों के साथ राहुल का पलटवार
हिरासत से बाहर आते ही राहुल कौशिक ने मीडिया के सामने आकर पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। राहुल का कहना है कि उन्होंने 2008 में UPSC परीक्षा पास की थी (ऑल इंडिया रैंक 728)। उनका चयन इंडियन पोस्टल सर्विस (IPoS) में हुआ था। सबूत के तौर पर उन्होंने गृह मंत्रालय का आईडी कार्ड, डाक विभाग का पहचान पत्र और 2008 के परीक्षा परिणाम की अखबार की कटिंग पेश की। राहुल का आरोप है कि 11-12 मार्च की रात 10-12 पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, उनके साथ बदसलूकी की और बिना पक्ष सुने उन्हें थाने में बैठाए रखा।

कहानी में ट्विस्ट, बर्खास्तगी और कानूनी लड़ाई
जांच में यह बात सामने आई है कि राहुल पूरी तरह फर्जी नहीं हैं, बल्कि उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आया था। 2017-18 में उन पर विभाग के भीतर धोखाधड़ी के आरोप लगे। 2019 में उन्हें सेवा से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया गया था। राहुल इस बर्खास्तगी के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में केस लड़ रहे हैं। यानी तकनीकी रूप से वह वर्तमान में ड्यूटी पर नहीं हैं, लेकिन वह पूर्व अधिकारी जरूर हैं।

एक फोन कॉल और मानसिक दबाव
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे बवाल की शुरुआत एक फोन कॉल से हुई। राहुल ने किसी सीनियर पुलिस अधिकारी को फोन किया था, जहां बातचीत बहस में बदल गई। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में उन्हें फर्जी अधिकारी घोषित कर उठा लिया। राहुल ने स्वीकार किया कि नौकरी जाने के बाद से वह मानसिक तनाव में हैं और उनका इलाज चल रहा है।

पुलिस की चुप्पी और अनसुलझे सवाल
राहुल के दस्तावेजों ने मेरठ पुलिस के आला अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब इस मामले पर आधिकारिक चुप्पी साध ली गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या गिरफ्तारी से पहले राहुल के रिकॉर्ड की जांच नहीं की गई? क्या किसी पूर्व अधिकारी को, जिसका मामला कोर्ट में लंबित हो, फर्जी कहना कानूनी रूप से सही है? क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक आपसी कहासुनी का बदला लेने के लिए की गई?

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