Edited By Pooja Gill,Updated: 29 Jan, 2026 11:48 AM

UP News: अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देने का एलान किया था, उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों...
UP News: अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देने का एलान किया था, उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों से उन्हें गहरा दुख हुआ है, जो कथित तौर पर प्रयागराज की पवित्र भूमि से हो रही हैं। सिंह ने कहा कि वह सरकार, संविधान और देश के चुने हुए नेतृत्व के समर्थन में यह कदम उठा रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘मैंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के समर्थन में और भारत के संविधान के समर्थन में इस्तीफा दिया है। उनके इस एलान के बाद अब जानकारी मिली है कि उनका इस्तीफा अभी तक शासन तक नहीं पहुंचा है और न ही राज्य कर आयुक्त कार्यालय में इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है।
फिलहाल नहीं होगी आगे की कार्रवाई
बता दें कि मंगलवार को प्रशांत कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में भावनात्मक बयान देते हुए इस्तीफे की घोषणा की थी। इस घोषणा से प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों हलकों में हलचल मच गई थी। हालांकि उसी रात उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है और संभावित कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफे की घोषणा की गई। लेकिन, उनका इस्तीफा अभी तक शासन तक नहीं पहुंचा। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब तक लिखित रूप में इस्तीफा प्राप्त नहीं होता, तब तक आगे की कोई कार्रवाई संभव नहीं है।
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शासन ने राज्य कर आयुक्त से मांगी पूरी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह से जुड़े पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। शासन ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ चल रही जांच, अब तक की विभागीय कार्रवाई, जारी नोटिस और भविष्य में संभावित कदमों की पूरी जानकारी शामिल की जाए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि इस्तीफे की घोषणा किन परिस्थितियों में की गई और क्या इसका सीधा संबंध उनके खिलाफ चल रही जांच से है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही शासन आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।