फेमस होकर चुनाव लड़ना चाहते हैं PCS अधिकारी अंलकार अन्गिहोत्री - बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर राजभर का तीखा हमला

Edited By Ramkesh,Updated: 27 Jan, 2026 03:22 PM

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उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओपी राजभर ने बरेली नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अन्गिहोत्री नेता बनना चाहते हैं’। यूजीसी को लेकर किसी को कोई...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओपी राजभर ने बरेली नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अन्गिहोत्री नेता बनना चाहते हैं’। यूजीसी को लेकर किसी को कोई दिक्कत है तो वह अपना वकील को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाए। इस मामले में सरकार से का कोई भी लेना देना नहीं है। राजभर ने कहा कि उनके मन में नेता बनने का सपना है इसी लिए उन्होंने इस्तीफा दिया है कि वह चाहते हैं यूजीसी मुद्दे को लेकर वह फेमस हो कर किसी पार्टी में शामिल होकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। 

अनुशासनहीनता के आरोप में अग्निहोत्री निलंबित
आप को बता दें कि बरेली नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। हालांकि सरकार ने अनुशासनहीनता के आरोप में अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं। 

जिला अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप
दरअसल, प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा। उनका कहना था कि यूजीसी के नए नियम जाति आधारित असंतोष को भड़का सकते हैं, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार सुबह यहां अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही सेवा से इस्तीफा दे दिया है और इसलिए निलंबन आदेश पर उन्हें कुछ नहीं कहना है।

अग्निहोत्री के समर्थन में उतरे कई सामाजिक संगठन
उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं, मैंने अपना इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद, आप मुझे निलंबित करें या कोई और कार्रवाई करें, इस पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है।” हालांकि, अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि पिछली रात जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में हुई एक घटना के दौरान, उन्होंने स्पीकर मोड पर एक फोन बातचीत सुनी, जिसमें एक व्यक्ति ने कथित तौर पर जिलाधिकारी सिंह से कहा, “पंडित पागल हो गए हैं, उन्हें पूरी रात बैठाए रखें। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही यह जानकारी पूरे राज्य में फैली, उन्हें कई जिलों से फोन आए और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए आपत्ति जताई। अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय जाने के लिए कहा गया है ताकि पता लगाया जा सके कि किसने फोन किया और ऐसी टिप्पणी की। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हम जल्द ही जिलाधिकारी कार्यालय जाकर अपना पक्ष रखेंगे और यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि यह टिप्पणी किसने की।

 सरकार ने दिए विभागीय जांच के आदेश 
सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया है और विभागीय जांच का आदेश दिया गया है, साथ ही जांच के दौरान उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "शामली जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि मैंने पहले ही इस्तीफा दे दिया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपना इस्तीफा एक दिन या उससे अधिक समय के लिए टालने या लिखित आवेदन देने के बाद छुट्टी पर जाने के लिए मनाने का प्रयास किया गया, जिससे उन्हें पहले निलंबित करने और "मामले को बदलने" का अवसर मिल जाता।

"ब्राह्मण-विरोधी पूर्वाग्रह" की धारणा का आरोप
उन्होंने दावा किया, "सौभाग्य से, मैं वहां मौजूद था और मैंने खुद बातचीत सुनी।" अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें इस्तीफा टालने के लिए मनाने के प्रयास किए गए ताकि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने आरोप लगाया, "जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो निलंबन आदेश देर रात जारी किया गया।" अग्निहोत्री ने यह भी दावा किया कि व्यवस्था के भीतर "ब्राह्मण-विरोधी पूर्वाग्रह" की धारणा है, और कहा कि ऐसा "टैग" सरकार के साथ जुड़ गया है। आगे की कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले जिलाधिकारी के कार्यालय जाएंगे और मीडिया के माध्यम से भी यह स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे कि फोन किसने किया और कथित टिप्पणी किसने की।
 

यूजीसी नियमों में संस्थानों से विशेष समितियां गठित
अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने अपना सरकारी आवास लगभग खाली कर दिया है और अपना अधिकांश सामान वहां से हटा लिया है। सोमवार को अग्निहोत्री ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को "काला कानून" बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए जारी नए यूजीसी नियमों में संस्थानों से विशेष समितियां गठित करने, हेल्पलाइन शुरू करने और निगरानी दल बनाने को कहा गया है ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों से निपटा जा सके। अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनसे फ़ोन पर बात की। 

ब्राह्मण विरोध की एक विशेष विचारधारा व्याप्त है
उन्होंने कहा, “मैं उनका सम्मान करता हूं। इस अलग मुद्दे पर अभी कुछ कहना मेरे लिए उचित नहीं होगा। बातचीत के दौरान मुझे उनका आशीर्वाद मिला।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कोई संदेश देना चाहेंगे, तो अग्निहोत्री ने कहा कि उनका किसी के प्रति कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। अग्निहोत्री ने कहा, “राज्य भर में ब्राह्मण विरोध की एक विशेष विचारधारा व्याप्त है - मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं।


अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले की जांच के लिएविशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश देने की अपील की है। अग्निहोत्री ने कहा कि “जब राज्य तंत्र विफल हो रहा है, तो प्रधानमंत्री को स्वयं एक एसआईटी का गठन करना चाहिए।” उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी जिला मजिस्ट्रेट से इस तरह बात की जा रही है, तो सबसे पहले उस व्यक्ति (फोन पर दूसरी तरफ मौजूद) की पहचान उजागर की जानी चाहिए जिसने कहा कि 'पंडित पागल हो गए हैं'। यह स्पष्ट रूप से उस व्यक्ति के ब्राह्मणों के प्रति पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

 

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