इटावा में चंबल नदी के मगरमच्छों से गांवों में दहशत

Edited By Tamanna Bhardwaj,Updated: 30 Jan, 2020 04:19 PM

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कभी खूंखार डाकुओं की शरणस्थली के तौर पर कुख्यात चंबल घाटी में मगरमच्छ के आतंक से चंबल नदी के आसपास के लोग दहशत में है।घडियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन जैसे हजारों दुर्लभ जलचरों के संरक्षित करने में जुटी चंबल नदी में पाएं जाने वाले मगरमच्छ अब नरभक्षी...

इटावाः कभी खूंखार डाकुओं की शरणस्थली के तौर पर कुख्यात चंबल घाटी में मगरमच्छ के आतंक से चंबल नदी के आसपास के लोग दहशत में है।घडियाल, मगरमच्छ और डाल्फिन जैसे हजारों दुर्लभ जलचरों के संरक्षित करने में जुटी चंबल नदी में पाएं जाने वाले मगरमच्छ अब नरभक्षी हो चुके है। मगरमच्छों के बढते आंतक की वजह से चंबल नदी के आसपास बसर करने वाले गांव वालों में खासी दहशत है।

चंबल सेंचुरी के वनाधिकारी आनंद कुमार ने गुरूवार को यहां बताया कि बुधवार को चंबल नदी के किनारे एक युवक को मगरमच्छ द्वारा अपना शिकार बनाए जाने का मामला संज्ञान में आया है। उसके बाद सेंचुरी विभाग के अधिकारियों को सक्रिय कर दिया गया है।

सूत्रों ने बताया कि इटावा के बढ़पुरा इलाके में चंबल नदी के किनारे बुधवार सुबह खरबूजे की फसल के लिए पानी लेने गए युवक को मगरमच्छ खींच ले गया। पास में ही फसल की रखवाली कर रहे पप्पू भदौरिया ने हल्ला मचाया और जब तक नदी के किनारे पहुंचता युवक लापता हो गया। घटना के बाद आसपास के खेतों में काम कर रहे लोगों की भीड़ जमा हो गई।

निर्जला एकादशी के व्रत को लेकर छह जून 2017 की शाम छह बजे अपने परिवार के कई सदस्यों के साथ चकरनगर इलाके के सिद्वबाबा मंदिर में दर्शन करने और चंबल नदी मे स्नान करने के लिए गई शिवराम सिंह चौहान की 19 वर्षीय बेटी नीरज चौहान को मगरमच्छ सबके सामने पानी मे खींच ले गये काफी खोजबीन के बाद लडकी का कोई पता नही चल सका । ऐसा माना जा रहा है कि लकडी के शरीर को मगरमच्छ पूरी तरह से खा गये इसलिए चंबल नदी मे काफी खोजबीन के बाद भी शरीर का कोई हिस्सा नही मिल सका है।

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