Bombay से उड़ी फ्लाइट... पहाड़ से टकराकर हो गई Crash, हादसे में देश ने खोया ऐसा 'रत्न' जो 18 महीने में बना देता परमाणु बम, 117 यात्रियों की मौके पर मौत!

Edited By Purnima Singh,Updated: 25 Jan, 2026 04:08 PM

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Homi Jehangir Bhabha Plane Crash : भारत के महान वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के शिल्पकार डॉ. होमी जहांगीर भाभा का 24 जनवरी 1966 को हुए एक भीषण विमान हादसे में असमय निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर देश के वैज्ञानिकों और दूरदर्शी नेताओं ने...

Homi Jehangir Bhabha Plane Crash : भारत के महान वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के शिल्पकार डॉ. होमी जहांगीर भाभा का 24 जनवरी 1966 को हुए एक भीषण विमान हादसे में असमय निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर देश के वैज्ञानिकों और दूरदर्शी नेताओं ने  आधुनिक भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्व के रूप में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि भारत के वैज्ञानिक इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक मानी जाती है, जिसने देश के परमाणु मिशन को गहरा आघात पहुंचाया।

जब आसमान में थम गई ‘कंचनजंघा’ की उड़ान
जनवरी 1966 में एयर इंडिया की फ्लाइट 101, जिसे ‘कंचनजंघा’ नाम दिया गया था, मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुई थी। विमान में डॉ. भाभा सहित कुल 117 लोग सवार थे। जेनेवा में उतरने से कुछ ही देर पहले यह विमान फ्रांस के फ्रेंच आल्प्स पर्वत श्रृंखला में स्थित माउंट ब्लांक की चोटी से टकरा गया।

मौके पर ही सभी 117 की मौत 
यह हादसा करीब 4,677 मीटर की ऊंचाई पर हुआ, जिसमें विमान में सवार सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में निधन के महज दो सप्ताह बाद यह देश के लिए दूसरी बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी थी।

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भारत के परमाणु सपनों के वास्तुकार
30 अक्टूबर 1909 को जन्मे डॉ. होमी भाभा केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के वैज्ञानिक ढांचे के निर्माता भी थे। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) जैसी प्रमुख संस्थाओं की स्थापना की। 1965 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि सरकार अनुमति दे, तो भारत मात्र 18 महीनों में परमाणु बम तैयार कर सकता है। उनके इस बयान ने वैश्विक शक्तियों का ध्यान भारत की ओर खींचा और देश को परमाणु ताकत बनने की दिशा में मजबूत आधार दिया।

हादसा या साजिश? उठते रहे सवाल
हालांकि आधिकारिक जांच रिपोर्ट में इस दुर्घटना को पायलट की गलती और तकनीकी खामी का परिणाम बताया गया, लेकिन समय के साथ कई साजिशों की थ्योरी सामने आती रहीं।
2008 में प्रकाशित किताब Conversations with the Crow में दावा किया गया कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने भारत के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए विमान में विस्फोट करवाया था। किताब में पूर्व CIA अधिकारी रॉबर्ट क्राउली के हवाले से यह बात कही गई थी।

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मुख्य स्थल से दूर-दूर तक बिखरा मिला था मलबा 
इसके अलावा, विमान का मलबा मुख्य टक्कर स्थल से दूर-दूर तक बिखरा मिला था। 2017 में एक स्विस पर्वतारोही को कुछ अवशेष मिले, जिससे कुछ विशेषज्ञों ने यह आशंका जताई कि शायद विमान किसी अन्य वस्तु से हवा में टकराया था। हालांकि इन दावों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

अमर है डॉ. भाभा की विरासत
डॉ. भाभा के निधन के बावजूद उनके सपनों की नींव पर भारत का परमाणु कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ता रहा। 1974 में पोखरण में हुए पहले परमाणु परीक्षण ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का परिचय कराया, जिसकी मजबूत आधारशिला डॉ. भाभा ने ही रखी थी।

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