बच्चों के अश्लील वीडियो; अमेरिका, इंग्लैंड समेत 47 देशों में भेजे, इंटरपोल की नजर में यूं आए सौदागर JE और पत्नी

Edited By Pooja Gill,Updated: 21 Feb, 2026 02:55 PM

pornographic of children were sent to 47 countries

लखनऊ: बांदा के रहने वाले दंपती रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को बच्चों के साथ दरिंदगी करने के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। जांच में सामने आया कि दोनों ने बच्चों के अश्लील वीडियो...

लखनऊ: बांदा के रहने वाले दंपती रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को बच्चों के साथ दरिंदगी करने के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। जांच में सामने आया कि दोनों ने बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 47 देशों में भेजे थे। इसी वजह से इंटरपोल की नजर उन पर पड़ी।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2010 से 2020 के बीच का है। चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात जेई रामभवन ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बांदा, चित्रकूट और आसपास के इलाकों के मासूम बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाया। सीबीआई (CBI) ने 18 नवंबर 2020 को रामभवन को गिरफ्तार किया था। छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से 8 मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, आपत्तिजनक सामान और 8 लाख रुपये नकद मिले थे। जांच में सामने आया कि यह जोड़ा बच्चों के यौन शोषण के वीडियो और फोटो डार्क वेब के माध्यम से लगभग 47 देशों में बेचता था।

ऑनलाइन स्टोरेज में रखते थे वीडियो
इंटरपोल ने आरोपियों के फोन नंबर, वीडियो, फोटो, ईमेल आईडी और अन्य डिजिटल सबूत इकट्ठा कर पेन ड्राइव के जरिए सीबीआई को भेजे। पेन ड्राइव में बच्चों से जुड़े 34 वीडियो और 679 फोटो मिले। इसके आधार पर सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच में पता चला कि रामभवन जीमेल और गूगल फोटो पर बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो सेव करता था। उसने न्यूजीलैंड की वेबसाइट मेगा एनजेड पर भी सैकड़ों जीबी स्टोरेज खरीद रखी थी, जहां वह सामग्री अपलोड करता था। कई बार गूगल की ओर से उसे चेतावनी भी दी गई थी। इन्हीं डिजिटल प्लेटफॉर्म से इंटरपोल ने सबूत जुटाए।

रिश्तेदार और किरायेदारों के बच्चों को भी बनाया शिकार
आरोप है कि रामभवन ने अपनी बहन के बेटे तक को नहीं छोड़ा, जिससे वह लंबे समय तक बीमार रहा। हमीरपुर में काम के दौरान एक व्यक्ति के छह बच्चों का भी शोषण किया गया। किराए के मकान में रहने के दौरान मकान मालिक के बच्चों को भी निशाना बनाया गया। दोषी रामभवन बच्चों को फुसलाने के लिए मोबाइल फोन, चॉकलेट और घड़ी जैसी चीजों का लालच देता था। खेल-खेल में वह बच्चों को अपने जाल में फंसाता और फिर उनके साथ दरिंदगी करता था। उसकी पत्नी दुर्गावती इस पूरे अपराध में उसकी बराबर की भागीदार थी। वह बच्चों को काबू करने और साक्ष्य छिपाने में मदद करती थी।

दरिंदगी की इंतहा: 3 साल के बच्चे भी थे शिकार
सीबीआई की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे रूह कपा देने वाले थे। पीड़ित बच्चों में कुछ की उम्र 3 साल से भी कम थी। यौन उत्पीड़न के दौरान कई बच्चे शारीरिक रूप से जख्मी हो गए थे। कुछ बच्चों की आंखों में भेंगापन तक आ गया था। आरोपी अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल (बच्चों का शोषण करने वाले) नेटवर्क से जुड़ा था और ईमेल के जरिए वीडियो का सौदा करता था।

अदालत का फैसला 
बांदा पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभतम) माना। कोर्ट में 50 से अधिक बच्चों ने अपने बयान दर्ज कराए, जिससे आरोपियों के खिलाफ केस बेहद मजबूत हुआ। 18 फरवरी 2026 को दोषी करार दिए जाने के बाद, अब कोर्ट ने पति-पत्नी दोनों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दोषी जेई की संपत्ति और घर से बरामद नकदी से प्रत्येक पीड़ित बच्चे के परिवार को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए। 31 अक्टूबर 2020 को दर्ज हुए इस मामले में सीबीआई ने 10 फरवरी 2021 को चार्जशीट दाखिल की थी। लगभग 5 साल चली कानूनी लड़ाई और ठोस पैरवी के बाद आज उन 50 मासूमों को न्याय मिला है, जिनका बचपन इन दरिंदों ने छीन लिया था।

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