भारत-अमेरिका व्यापार समझौता प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का परिणाम: CM Yogi

Edited By Purnima Singh,Updated: 08 Feb, 2026 11:17 AM

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व का परिणाम है। शनिवार देर रात जारी एक आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व का परिणाम है। शनिवार देर रात जारी एक आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत प्रस्तावित भारत-अमेरिका शुल्क (टैरिफ) रूपरेखा राज्य की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इससे लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और श्रम-प्रधान उद्योगों को संरचनात्मक सहयोग मिलेगा तथा निवेश और रोजगार के दीर्घकालिक अवसर सृजित होंगे। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रूपरेखा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व" का परिणाम है और किसानों के हितों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा करते हुए भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करेगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह पहल 'मेक इन इंडिया' को मजबूती देने के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने इस समझौते को आगे बढ़ाने में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत जारी संयुक्त बयान ने उत्तर प्रदेश की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत संकेत दिया है। 

उन्होंने कहा कि इस समझौते का प्रभाव केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कपड़ा उद्योग, लेदर, कृषि-आधारित उद्योग, एमएसएमई और औद्योगिक विनिर्माण जैसे उन क्षेत्रों पर भी पड़ेगा, जिनमें उत्तर प्रदेश की भागीदारी राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख है। योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''वैश्विक स्तर पर हस्तनिर्मित कालीनों के लिए प्रख्यात भदोही-मिर्जापुर कालीन निर्माण क्षेत्र लंबे समय से ऊंचे आयात शुल्क के कारण अमेरिकी बाजार में मूल्य प्रतिस्पर्धा की चुनौती झेल रहा था। शुल्क में कटौती के बाद इन उत्पादों की लागत संरचना में सुधार की संभावना है, जिससे निर्यात ऑर्डर और दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों को बढ़ावा मिल सकता है।'' 
 

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