Edited By Anil Kapoor,Updated: 20 Feb, 2026 01:52 PM
RaeBareli News: यूपी का जनपद रायबरेली... जहां एक ऐसा परिवार रह रहा था जो कई पीढ़ियों से अपनी मेहनत, अपने हुनर और अपने सपनों से जिंदगी गढ़ रहा था, लेकिन उसके सपनों को तब झटका लगा जब उसी घर की चौखट पर डाकिया एक ऐसा खत छोड़ गया, जिसे खोलते ही पैरों...
RaeBareli News(शिवकेश सोनी): यूपी का जनपद रायबरेली... जहां एक ऐसा परिवार रह रहा था जो कई पीढ़ियों से अपनी मेहनत, अपने हुनर और अपने सपनों से जिंदगी गढ़ रहा था, लेकिन उसके सपनों को तब झटका लगा जब उसी घर की चौखट पर डाकिया एक ऐसा खत छोड़ गया, जिसे खोलते ही पैरों तले जमीन खिसक गई…सांसें थम गई… और यकीन टूट गया… जी हां, रायबरेली से आई ये खबर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। दरअसल, यहां मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार को वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी का ऐसा नोटिस आया है कि मोहम्मद शाहिद का पूरा परिवार सकते में आ गया है. बताया जा रहा है कि उसे 1 करोड़ 25 हजार 297 रुपये का जीएसटी नोटिस मिला है।
बता दें कि कुम्हार को ये नोटिस डाक के जरिये मिली है, जिसे केंद्रीय माल एवं सेवा कर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क, वैशाली प्रभा मंडल हाजीपुर ने जारी किया है। हैरानी की बात तो यह है कि मिट्टी के बर्तन बनाने वाले इस कुम्हार के पास नोटिस का एक फीसदी भी कुल चल अचल संपत्ति नहीं है। नोटिस मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया है। जानकारी के लिए आपको बता दें, मोहम्मद शहीद हरचंदपुर थाना क्षेत्र के रघुवीरगंज बाजार में रहते हैं। वह पुश्तैनी तौर पर कुल्हड़, मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाकर अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वह पढ़े-लिखे नहीं हैं। जिसकी वजह से उन्हें नोटिस को समझने में भी परेशानी हो रही है।
मोहम्मद शहीद ने खुद को एक साजिश और धोखाधड़ी का शिकार ठहराया है. पीड़ित कुम्हार का आरोप है कि उनके पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल करके एक फर्जी फर्म बनाई गई है, उन्होंने किसी भी तरह की साझेदारी या बड़े कारोबार से साफ-साफ इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं पीड़ित ने इस पूरे मामले में जांच की मांग करते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि मेरी पत्नी साजिदा और तीन बच्चों के साथ मैं अपने परिवार का मिट्टी के बर्तन सुराही घड़ा खिलौने बनाकर जीवन निर्वाह कर रहा हूं। यह मेरा पुश्तैनी धंधा है।
खैर अब सवाल ये है कि आखिर एक मेहनतकश कुम्हार, जो पुश्तैनी तौर पर कुल्हड़, घड़ा, सुराही और मिट्टी के खिलौने बनाकर परिवार चलाता है, उसके नाम पर करोड़ों का जीएसटी नोटिस कैसे? क्या यह सिस्टम की चूक है, पहचान की चोरी है या किसी सुनियोजित फर्जीवाड़े का मामला? फिलहाल, परिवार प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगा रहा है। देखना होगा कि जिम्मेदार एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं, ताकि एक आम कारीगर का भरोसा सिस्टम पर कायम रह सके।