Maghi Purnima 2026: ब्रह्म मुहूर्त से संगम पर उमड़ा आस्था का महासैलाब, रवि-पुष्य योग में करोड़ों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य डुबकी!

Edited By Anil Kapoor,Updated: 01 Feb, 2026 08:04 AM

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Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज में चल रहे ऐतिहासिक माघ मेला 2026 का उत्साह अपने चरम पर है। आज मेला का सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व ‘माघी पूर्णिमा’ है। इस अवसर पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की आस्था

Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज में चल रहे ऐतिहासिक माघ मेला 2026 का उत्साह अपने चरम पर है। आज मेला का सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व ‘माघी पूर्णिमा’ है। इस अवसर पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की आस्था का समंदर उमड़ पड़ा है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही, रवि पुष्य योग के दुर्लभ संयोग में डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं।

संगम और सरयू तट पर उमड़ी भारी भीड़
माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर यूपी के पवित्र तीर्थों पर स्नान का क्रम जारी है। संगम तट पर सुबह 6 बजे तक 50 लाख से अधिक श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। प्रशासन का अनुमान है कि शाम तक यह संख्या 1.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।

रवि पुष्य योग में स्नान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघी पूर्णिमा पर स्वर्गलोक से देवता पृथ्वी पर आते हैं और संगम में स्नान करते हैं। इस बार रवि पुष्य योग होने के कारण पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आज स्नान के बाद दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है और साधक को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।

सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम
मेला प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। मेला क्षेत्र को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए पहली बार 150 AI युक्त कैमरे लगाए गए हैं। कुल 400 CCTV और ड्रोन कैमरों से हर जगह नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए यूपी एटीएस के कमांडो, RAF, PAC और BDS की टीमें मुस्तैद हैं। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्नान घाटों पर NDRF, SDRF और जल पुलिस के गोताखोर 24 घंटे गश्त कर रहे हैं।

1.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने आज के स्नान पर्व के लिए 1 से 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया है। अब तक इस साल मेला में 18 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहली बार 9 पांटून ब्रिज बनाए गए हैं और पूरे 800 हेक्टेयर क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त घोषित किया गया है।

कल्पवास का समापन और ट्रैफिक प्लान
माघी पूर्णिमा के साथ ही पौष पूर्णिमा से चल रहा एक माह का कठिन ‘कल्पवास’ भी समाप्त हो रहा है। आज स्नान के बाद लाखों कल्पवासी और साधु-संत अपने घरों की ओर लौटेंगे।

भीड़ और वापसी को देखते हुए प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है:
- मेला क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित।
- श्रद्धालुओं की वापसी के लिए ‘वन-वे’ ट्रैफिक व्यवस्था।
- प्रमुख स्नान पर्व होने के कारण कोई भी वीआईपी मूवमेंट नहीं, ताकि आम जनता को असुविधा न हो।

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