विधानभवन में बसपा-कांग्रेस को मिला छोटा केबिन, सपा का कार्यालय हुआ बड़ा

Edited By Ajay kumar,Updated: 27 Nov, 2023 07:48 AM

bsp congress got small cabin in vidhan bhavan sp s office got bigger

राज्य विधान मंडल ( विधानसभा और विधान परिषद भवन) में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी को मिले बड़े दफ्तर वापस ले लिए गए हैं। अब दोनों दलों को केबिन दिया गया है। ये केबिन लोक दल और सुभासपा कार्यालय छिनने पर कांग्रेस और बसपा के नेताओं ने नाराजगी जताई...

लखनऊ: राज्य विधान मंडल ( विधानसभा और विधान परिषद भवन) में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी को मिले बड़े दफ्तर वापस ले लिए गए हैं। अब दोनों दलों को केबिन दिया गया है। ये केबिन लोक दल और सुभासपा कार्यालय छिनने पर कांग्रेस और बसपा के नेताओं ने नाराजगी जताई कार्यालय के पास हैं। वहीं, बसपा और कांग्रेस कार्यालय को मिलाकर समाजवादी पार्टी को मिला कार्यालय बड़ा कर दिया गया है। दरअसल, इन कमरों का इस्तेमाल राजनीतिक दलों द्वारा विधान मंडल में दफ्तर के रूप में किया जाता रहा है। जिनमें एमएलए और एमएलसी बैठते हैं। विधान मंडल सचिवालय ने यह कदम विधानसभा में दोनों पार्टियों का संख्याबल कम होने के नाते उठाया है। कांग्रेस पार्टी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब सबसे बड़े राज्य के विधान मंडल के भीतर उनका बड़ा कार्यालय छिन गया।

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कांग्रेस, बसपा से बड़े दल बने रालोद और सुभासपा
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने केवल एक विधानसभा की सीट जीती थी, जबकि कांग्रेस पार्टी केि खाते में मात्र दो सीट आई थीं। ऐसे में विधानसभा में जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (9) और ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (6), बसपा और कराए गए हैं। सौंदर्गीकरण कार्य के बाद नये सिरे कक्षों का आवंटन विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। ऐसे में दलों की संख्याबल भी नजरंदाज की जा सकती है। कांग्रेस से बड़े दल हो चुके हैं।

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राजा भैया की पार्टी बसपा से बड़ी पार्टी
यही नहीं राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक (2) भी बसपा से बड़ी पार्टी और कांग्रेस के बराबर है। विधानभवन में इन दिनों सौंदर्गीकरण का काम चल रहा है। इसी बहाने कांग्रेस और बसपा से कार्यालय खाली करा लिया गया। हकीकत यह है कि उप्र. विधानसभा सदस्य नियमावली 1987 की धारा 157 (2) कहती है कि ऐसे दल जिनकी सदस्य संख्या 25 या उससे अधिक है, उन्हें सचिवालय द्वारा कक्ष, चपरासी, टेलीफोन आदि उन शर्तों के साथ दिए जा सकते हैं। इसी आधार पर विधान मंडल में बसपा और कांग्रेस के कार्यालय लंबे अर्से से आवंबटित थे। केबल दोनों राजनीतिक दलों के ही नहीं शासन के तमाम अफसरों के कमरे भी खाली कराए गए हैं। सौंदर्यीकरण कार्य के बाद नए सिरे कक्षों का आवंटन विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। एसे में दलों की संख्याबल भी नजरअंदाज की जा सकती है।

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