Edited By Anil Kapoor,Updated: 10 Jan, 2026 02:43 PM

UP Desk: उत्तर प्रदेश के सबसे खतरनाक अपराधियों में शामिल श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम 90 के दशक में पुलिस, नेता और अफसरों के लिए सबसे बड़ा डर बन चुका था। लेकिन जिस डॉन से पूरा सिस्टम कांपता था, उसकी जिंदगी का अंत उसकी अपनी एक कमजोरी उसका प्यार......
UP Desk: उत्तर प्रदेश के सबसे खतरनाक अपराधियों में शामिल श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम 90 के दशक में पुलिस, नेता और अफसरों के लिए सबसे बड़ा डर बन चुका था। लेकिन जिस डॉन से पूरा सिस्टम कांपता था, उसकी जिंदगी का अंत उसकी अपनी एक कमजोरी उसका प्यार बन गया।
साधारण परिवार से अपराध की दुनिया तक
श्रीप्रकाश शुक्ला का जन्म गोरखपुर में एक स्कूल शिक्षक के घर हुआ था। पढ़ाई में ठीक-ठाक और कुश्ती-पहलवानी का शौक रखने वाला यह लड़का धीरे-धीरे दबंगई की ओर बढ़ गया। गलत संगत और हालात ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया।
18 साल की उम्र में पहला कत्ल
महज 18 साल की उम्र में अपनी बहन से बदसलूकी का बदला लेने के लिए उसने एक युवक की हत्या कर दी। यही उसकी अपराधी जिंदगी की शुरुआत थी। इसके बाद हत्या, अपहरण, रंगदारी और सुपारी किलिंग का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ ही सालों में वह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा गैंगस्टर बन गया।
राजनीति और अंडरवर्ल्ड से जुड़ाव
90 के दशक में अपराध और राजनीति का गहरा गठजोड़ था। शुक्ला को भी कई राजनीतिक संरक्षण मिले। उसने बड़े नेताओं और बाहुबलियों के लिए काम किया और धीरे-धीरे उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक हो गई।
विधायक और मंत्री की हत्या से मचा हड़कंप
1997 में लखनऊ में विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही की हत्या और इसके बाद बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या ने उसे पूरे देश में कुख्यात बना दिया। इंटेलिजेंस को यह जानकारी भी मिली कि उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ले ली है। इसके बाद यूपी पुलिस ने उसके खात्मे के लिए STF का गठन किया।
डॉन की एक कमजोरी – उसका प्यार
इतना बड़ा अपराधी होने के बावजूद श्रीप्रकाश शुक्ला की एक कमजोरी थी – उसकी प्रेमिका, जो गाजियाबाद की रहने वाली थी। वह उससे घंटों फोन पर बात करता था। उसने उसे एक महंगा मोबाइल भी दिलाया था ताकि हमेशा संपर्क में रह सके। यही फोन उसकी सबसे बड़ी गलती बन गया।
वो आखिरी फोन कॉल
22 सितंबर 1998 को शुक्ला ने नोएडा के एक पीसीओ से अपनी प्रेमिका को फोन किया और उससे मिलने गाजियाबाद जाने की बात कही। पुलिस पहले से ही उसके नंबर को सर्विलांस पर रखे हुए थी। जैसे ही कॉल ट्रेस हुआ, STF हरकत में आ गई।
इंदिरापुरम में आखिरी मुठभेड़
जब शुक्ला अपनी नीली सिएलो कार से गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में पहुंचा, STF ने उसकी घेराबंदी कर ली। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन शुक्ला और उसके साथियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी गोलीबारी में STF की गोलियों से श्रीप्रकाश शुक्ला मारा गया।
प्यार ही बना मौत की वजह
जिस अपराधी को पुलिस सालों तक पकड़ नहीं पाई, वह सिर्फ अपनी प्रेमिका से मिलने की चाहत में सामने आ गया। वह उससे आखिरी बार मिल भी नहीं सका। उसकी एक फोन कॉल ने उसका ठिकाना बता दिया और वही उसकी मौत का कारण बन गई।