मिशन 2027 की बिसात: लखनऊ में योगी-भागवत की 40 मिनट की 'महामुलाकात', UP में होने वाला है कोई बड़ा सियासी उलटफेर?

Edited By Anil Kapoor,Updated: 19 Feb, 2026 06:39 AM

cm yogi met mohan bhagwat talked for half an hour discussed 2027 elections

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते बुधवार शाम को एक बड़ी राजनीतिक सरगर्मी देखी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत से निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मुलाकात....

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते बुधवार शाम को एक बड़ी राजनीतिक सरगर्मी देखी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत से निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मुलाकात की। लगभग 30 से 40 मिनट तक चली इस 'बंद कमरे' की बैठक ने प्रदेश के सियासी गलियारों में नई चर्चाएं छेड़ दी हैं।

बैठक के मुख्य बिंदु और चुनावी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा का केंद्र आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव और संगठन की मजबूती था। हालांकि इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे गहरे राजनीतिक मायने छिपे हैं। मुलाकात में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर लंबी चर्चा हुई। विपक्षी दलों के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए संघ और भाजपा की साझा रणनीति पर मंथन हुआ। हाल ही में मोहन भागवत ने 'मंदिर, कुआं और श्मशान' सबके लिए समान होने की बात कही थी। बैठक में इस विचार को सरकारी नीतियों और सामाजिक स्तर पर लागू करने पर विचार किया गया।

मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव की सुगबुगाहट
माना जा रहा है कि इस मुलाकात में उत्तर प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी की गई। चर्चा है कि आने वाले कुछ महीनों में भाजपा के प्रदेश संगठन में कुछ नए चेहरों को जगह मिल सकती है।  खाली पदों को भरने और कुछ विभागों की जिम्मेदारी बदलने पर भी सहमति बन सकती है। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका पर भी बात हुई।

मुलाकात का समय क्यों है महत्वपूर्ण?
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में जनसंपर्क अभियान चला रहा है। साथ ही, हाल के दिनों में जातिगत जनगणना और आरक्षण जैसे मुद्दों पर मचे घमासान के बीच संघ प्रमुख का "सभी जातियों को साथ लेकर चलने" का संदेश काफी अहम माना जा रहा है।

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