सिलेंडर गायब, भट्टी चालू! लखनऊ में LPG संकट ने आम आदमी को किया बेहाल, शादियों और दावतों का बिगड़ा बजट

Edited By Anil Kapoor,Updated: 12 Mar, 2026 11:04 AM

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Lucknow News: नवाबों के शहर लखनऊ में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत ने आम जनता और व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि जो शहर अपनी आधुनिकता और खान-पान के लिए जाना जाता है, वहां आज लोग दशकों पीछे लौट गए हैं। गैस की कमी ने होटलों से लेकर घरों...

Lucknow News: नवाबों के शहर लखनऊ में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत ने आम जनता और व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि जो शहर अपनी आधुनिकता और खान-पान के लिए जाना जाता है, वहां आज लोग दशकों पीछे लौट गए हैं। गैस की कमी ने होटलों से लेकर घरों तक चूल्हे बुझा दिए हैं और लोग अब कोयले व लकड़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं।

गली-गली जल रही हैं भट्टियां, कोयला हुआ सोना
गैस सिलेंडर ना मिलने के कारण स्ट्रीट फूड वेंडर्स, ढाबा मालिकों और टिफिन सर्विस चलाने वालों ने अब मिट्टी की भट्टियों का रुख कर लिया है। बाजार में अचानक लकड़ी और कोयले की मांग 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पिछले दो दिनों में शहर में करीब 450 नई मिट्टी की भट्टियों की मांग दर्ज की गई है। शहर के चौक-चौराहों और गलियों में अब धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है।

रेस्टोरेंट का जायका हुआ आधा, शादियों में बढ़ी मुसीबत
गैस संकट ने लखनऊ के लजीज व्यंजनों पर भी ब्रेक लगा दिया है। कई बड़े रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू को आधा कर दिया है। गैस न होने की वजह से चुनिंदा डिशेज ही बन पा रही हैं। शहर में हर दिन होने वाली 1200 से 1500 शादियों में कैटरर्स की सांसें फूली हुई हैं। हलवाई अब गैस की जगह लकड़ी की आग पर खाना पका रहे हैं, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं।

छात्रों और टिफिन सेवा पर सबसे बड़ी मार
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और पीजी (PG) में रहने वालों के लिए यह संकट दोहरी मार लेकर आया है। टिफिन संचालकों का कहना है कि इंडक्शन पर भारी मात्रा में खाना बनाना मुमकिन नहीं है। अगर यही हाल रहा तो उन्हें सेवाएं बंद करनी पड़ेंगी। जो लोग इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके सामने भारी-भरकम बिजली बिल का डर सता रहा है।

एजेंसियों पर रणसंग्राम, सफाई व्यवस्था भी लड़खड़ाई
गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। लोग काम-धंधा छोड़कर सिलेंडर की उम्मीद में घंटों खड़े हैं। जिला प्रशासन ने एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी है और किसी भी कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। ईंधन की कमी की आंच अब नगर निगम के वाहनों तक भी पहुंच गई है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

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