Edited By Anil Kapoor,Updated: 11 Mar, 2026 02:19 PM

Meerut News: अगर आप भी अपने बच्चे के रोने या जिद करने पर उसके हाथ में स्मार्टफोन थमा देते हैं, तो ठहर जाइए। आपकी यह छोटी सी सुविधा आपके बच्चे को एक भयानक मानसिक और शारीरिक रोगी बना रही है। मेरठ के मनोवैज्ञानिकों के पास इन दिनों ऐसे केस आ रहे हैं,...
Meerut News: अगर आप भी अपने बच्चे के रोने या जिद करने पर उसके हाथ में स्मार्टफोन थमा देते हैं, तो ठहर जाइए। आपकी यह छोटी सी सुविधा आपके बच्चे को एक भयानक मानसिक और शारीरिक रोगी बना रही है। मेरठ के मनोवैज्ञानिकों के पास इन दिनों ऐसे केस आ रहे हैं, जिन्हें सुनकर आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे।
सोते में फोन हटाया तो देने लगा गालियां
मेरठ की वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. कशिका जैन ने एक चौंकाने वाले मामले का जिक्र किया। उनके पास एक ऐसा बच्चा इलाज के लिए आया जो सोते वक्त भी मोबाइल अपने पास रखता है। अगर सोते समय भी उसके बगल से फोन हटा लिया जाए, तो वह तुरंत जाग जाता है और पागलों की तरह चिल्लाने और गालियां देने लगता है। यह महज एक जिद नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक बीमारी (Mobile Addiction) है, जिसके लिए अब उस बच्चे का मनोवैज्ञानिक उपचार (Psychological Treatment) चल रहा है।
रीढ़ की हड्डी हो रही टेढ़ी, आंखों पर भी संकट
डॉक्टरों के मुताबिक, मोबाइल की लत बच्चों को सिर्फ मानसिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी अपाहिज बना रही है। छोटे बच्चे घंटों तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखते हैं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी (Spine) में कम उम्र में ही समस्या शुरू हो रही है। मोबाइल से निकलने वाली किरणें बच्चों के नाजुक दिमाग के लिए बेहद हानिकारक हैं। बच्चे अब बाहर खेलने के बजाय डिजिटल स्क्रीन में कैद हो गए हैं, जिससे उनका सामाजिक विकास रुक गया है।
CM योगी की चेतावनी- 'बच्चों को फोन देना अपराध है'
इस गंभीर मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चिंता जता चुके हैं। गोरखपुर महोत्सव के दौरान उन्होंने कहा था कि मैं देखता हूं लोग छोटे बच्चों को स्मार्टफोन पकड़ा देते हैं। ऐसा मत करिए, यह अपराध है। स्मार्टफोन बच्चे को जिद्दी और डिप्रेशन का शिकार बना देता है। उन्हें लिखने-पढ़ने और शारीरिक गतिविधियों की आदत डलवाएं।
कोरोना काल ने बिगाड़ा खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना काल में शुरू हुई ऑनलाइन क्लासेस ने बच्चों के हाथ में मजबूरी में मोबाइल दिया था, लेकिन अब यह एक जानलेवा लत बन चुकी है। बच्चे अब घंटों स्क्रीन के सामने बिताते हैं और फोन ना मिलने पर हिंसक व्यवहार करने लगते हैं।
अभिभावकों के लिए डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा वही सीखता है जो वह अपने आसपास देखता है। अगर माता-पिता खुद हर समय फोन में लगे रहेंगे, तो बच्चा भी वही करेगा। पहले खुद मोबाइल का आकर्षण कम करें। बच्चों के लिए मोबाइल इस्तेमाल का एक समय निर्धारित करें। बच्चों को बाहर ले जाएं, उनके साथ खेलें और उन्हें किताबों की ओर मोड़ें।