सिलेंडर के दाम बढ़ने पर सरकार को शर्म नहीं- सपा सांसद ने सरकार पर बोला हमला

Edited By Ramkesh,Updated: 10 Mar, 2026 02:13 PM

the government is not ashamed of the increase in cylinder prices  sp mp attacks

गाजीपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी ने गैस सिलेंडर की बढती कीमतों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि देश में पहले गैस सिलेंडर करीब 400 रुपये में मिल जाता था, लेकिन अब इसकी कीमत लगातार बढ़ती जा रही...

लखनऊ: गाजीपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी ने गैस सिलेंडर की बढती कीमतों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि देश में पहले गैस सिलेंडर करीब 400 रुपये में मिल जाता था, लेकिन अब इसकी कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। सांसद ने कहा कि पहले जब गैस सिलेंडर की कीमत 400 रुपये थी, तब भाजपा के नेता इसे लेकर हंगामा करते थे और सरकार पर सवाल उठाते थे। लेकिन अब वही सिलेंडर 1200 रुपये तक पहुंच गया है और हाल ही में इसमें करीब 60 रुपये की और बढ़ोतरी कर दी गई है।

महंगाई से आम जनता परेशान
अफजाल अंसारी ने कहा कि महंगाई से आम जनता परेशान है, लेकिन सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं दिख रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतनी बड़ी कीमत बढ़ने के बावजूद सरकार को जरा भी शर्म नहीं आ रही है। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महंगाई से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है। उन्होंने सरकार से गैस सिलेंडर की कीमतों में राहत देने की मांग भी की।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से ईंधन आपूर्ति पर पड़ा असर 
आप को बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति शृंखला पर बड़ा असर पड़ा है। ऐसे हालात में सरकार ने घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है, जिससे बाजार मूल्य वाले वाणिज्यिक एलपीजी का उपयोग करने वाले होटल एवं रेस्तरां को आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ रहा है। भारत में सालाना करीब 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा घरेलू रसोई गैस का है जबकि बाकी का उपयोग होटल, रेस्तरां और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में होता है। 

एलपीजी का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से मंगाता है भारत 
देश की कुल एलपीजी जरूरत का करीब 62 प्रतिशत आयात से पूरा होता है। ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल के संयुक्त हमले और फिर ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल एवं गैस आयात प्रभावित हुआ है। इसी मार्ग से भारत को सऊदी अरब जैसे देशों से एलपीजी आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा मिलता है।

वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत की तलाश कर रही सरकार 
सरकार इस समय वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत की तलाश कर रही है, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण घरेलू क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान प्रभावित हो रहे हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार इस आपूर्ति बाधा का असर मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में दिखने लगा है, जहां होटल और रेस्तरां को रसोई गैस उपलब्ध कराने में मुश्किल हो रही है। इंडिया होटल्स एंड रेस्तरां एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने कहा कि गैस की किल्लत तेजी से बढ़ रही है और यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो यह पूरे क्षेत्र के संचालन को प्रभावित कर सकती है।

जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने लिए उठाया कदम 
हालांकि मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हाल के दिनों में पेट्रोलियम रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन घटाकर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय ने कहा, "मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए घरेलू एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। साथ ही एलपीजी सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच का अंतराल भी 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी रोकी जा सके।" मंत्रालय ने कहा कि आयातित एलपीजी से गैर-घरेलू क्षेत्र में भी अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
 

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