शहनाई से पहले छलके पिता के आंसू! Cylinder के लिए दर-दर भटका, सिस्टम की इस बेरुखी ने उड़ा दी सबकी नींद

Edited By Anil Kapoor,Updated: 12 Mar, 2026 07:16 AM

a father s honor is at stake in amethi daughter s wedding and an empty cylinder

Amethi News: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है। एक तरफ प्रशासन जिले में पर्याप्त गैस स्टॉक होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक पिता अपनी बेटी के हाथ पीले होने...

Amethi News: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है। एक तरफ प्रशासन जिले में पर्याप्त गैस स्टॉक होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक पिता अपनी बेटी के हाथ पीले होने से ठीक पहले एक अदद गैस सिलेंडर के लिए सुबह से रात तक कतार में खड़ा रहने को मजबूर है।

जानिए, क्या है पूरा मामला?
अमेठी तहसील के अंतर्गत आने वाले Dedh Pasar Village के रहने वाले रविंद्र नाथ तिवारी के घर में शहनाइयां बजनी हैं। बेटी की शादी की खुशियों के बीच अचानक घरेलू गैस (LPG) की कमी ने खुशियों में खलल डाल दिया। बेटी की शादी का घर छोड़कर रविंद्र नाथ तिवारी सुबह ही गैस एजेंसी पहुंच गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि बुकिंग के आधार पर सिलेंडर मिल जाएगा और घर जाकर हलवाई अपना काम शुरू कर देगा। पूरा दिन बीत गया, सूरज ढल गया, लेकिन एजेंसी से सिलेंडर नहीं मिला। पिता की आंखों में बेटी की विदाई की खुशी से ज्यादा शादी के इंतजाम पूरे ना हो पाने का डर साफ दिख रहा था।

जब लकड़ी की आग पर बनीं मिठाइयां
घर पर हलवाई सुबह से ही गैस का इंतजार करता रहा। जब शाम तक सिलेंडर नहीं मिला और उम्मीद टूट गई, तो मजबूरन शादी का खाना और मिठाइयां बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ा। रविंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि अगर समय पर गैस नहीं मिली तो मेहमानों के सामने मेरी इज्जत पर आंच आ जाएगी। बुकिंग होने के बावजूद हमें खाली हाथ लौटाया जा रहा है।

अधिकारी और जनता के बीच विरोधाभास
एक तरफ जनता गैस के लिए घंटों लाइनों में लगी है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों के सुर कुछ और ही हैं। जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) शशिकांत का कहना है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और कम से कम 2-3 दिन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि अगर स्टॉक है, तो वह आम आदमी तक क्यों नहीं पहुंच रहा? लंबी लाइनों के बावजूद लोगों को खाली हाथ क्यों लौटना पड़ रहा है?

खड़े होते गंभीर सवाल
बेटी की शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर एक पिता का इस तरह भटकना हमारी आपूर्ति व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या यह सिर्फ डिमांड-सप्लाई का अंतर है या वितरण प्रणाली में कोई बड़ी गड़बड़ी? फिलहाल, यह खबर सोशल मीडिया पर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।

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