ग्रेटर नोएडा में पानी बना जहर! डेल्टा-1 और अल्फा-2 में बीमार पड़े लोग—जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, मौतों के आरोप से हड़कंप

Edited By Anil Kapoor,Updated: 08 Jan, 2026 02:02 PM

contaminated water causes chaos in greater noida investigation is just a formal

Noida News:  दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में दूषित पानी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि लोग बीमार पड़ रहे हैं और अब मौतों तक के आरोप सामने आने लगे हैं। बुधवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी हरकत में तो आई, लेकिन लोगों...

Noida News:  दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में दूषित पानी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि लोग बीमार पड़ रहे हैं और अब मौतों तक के आरोप सामने आने लगे हैं। बुधवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी हरकत में तो आई, लेकिन लोगों का आरोप है कि जांच सिर्फ दिखावे तक सीमित रही।

आंखों से देखकर दे दी गई 'क्लीन चिट'
स्थानीय लोगों का कहना है कि अथॉरिटी के अधिकारी जांच के नाम पर केवल पानी को देखकर चले गए। न तो पानी के सैंपल लिए गए और न ही टीडीएस (TDS) की कोई जांच की गई। जल विभाग के सीनियर मैनेजर समेत कई अधिकारी प्रभावित सेक्टरों में पहुंचे थे, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टरों की टीम जरूर मौके पर पहुंची और मेडिकल कैंप लगाया गया, जहां बीमार लोगों की जांच की गई।

डेल्टा-1 और अल्फा-2 में फूटा लोगों का गुस्सा
सेक्टर डेल्टा-1 में दूषित पानी का मामला सामने आने के बाद अल्फा-2 सेक्टर के लोगों ने भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। एक व्यक्ति ने दावा किया कि करीब पांच महीने पहले दूषित पानी पीने से उसके जवान बेटे की किडनी खराब हो गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इस दावे के बाद इलाके में तनाव और गुस्सा और बढ़ गया।

आरडब्ल्यूए ने लगाए गंभीर आरोप
सेक्टर डेल्टा-1 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष प्रमोद भाटी ने कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी इंदौर जैसी घटनाओं से भी कोई सबक नहीं ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद कुछ घरों में कर्मचारी भेजे गए, लेकिन बिना किसी वैज्ञानिक जांच के पानी को सही बता दिया गया।

मेडिकल कैंप में सामने आई बीमारियों की तस्वीर
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए मेडिकल कैंप में 25 से ज्यादा लोगों ने अपनी जांच कराई। जांच में सबसे ज्यादा शिकायतें पेट दर्द, दस्त, उल्टी और कमजोरी की पाई गईं. डॉक्टरों ने लोगों को दवाइयां दीं और साफ पानी पीने की सलाह दी।

सीवर और जर्जर पाइपलाइन बनी बड़ी वजह
सेक्टर अल्फा-2 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सुभाष ने बताया कि पानी की सप्लाई के लिए लगी लोहे की पाइपलाइनें अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। ये पाइपलाइनें नालियों और सीवर के पास से गुजर रही हैं, जिससे गंदगी सीधे पानी में मिल रही है। स्थानीय निवासी अर्चना मिश्रा ने कहा कि भारी पानी चार्ज देने के बावजूद उन्हें साफ पानी नहीं मिल रहा। उनका पूरा परिवार पिछले दो महीनों से पेट की बीमारियों से परेशान है। वहीं अनीता गौतम ने बताया कि पिछले महीने दूषित पानी के कारण उनके पोते की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। करनैल सिंह ने दावा किया कि दूषित पानी की वजह से ही पांच महीने पहले उनके 40 वर्षीय बेटे की मौत हो गई।

लोग बोले—अब सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए
लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सेक्टर अल्फा-2 के लोग आई-ब्लॉक में एकत्र हुए और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों की मांग है कि जर्जर पाइपलाइन तुरंत बदली जाए, पानी की वैज्ञानिक जांच हो और जब तक साफ पानी की व्यवस्था न हो, वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं।

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