Edited By Anil Kapoor,Updated: 03 Mar, 2026 10:17 AM

Rampur News: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने रामपुर की राजनीति में एक ऐसी चाल चली है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अखिलेश ने आजम खान की मर्जी और उनकी अनुपस्थिति के बावजूद, बहुजन समाज पार्टी से सपा में आए पूर्व दर्जा प्राप्त...
Rampur News: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने रामपुर की राजनीति में एक ऐसी चाल चली है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अखिलेश ने आजम खान की मर्जी और उनकी अनुपस्थिति के बावजूद, बहुजन समाज पार्टी से सपा में आए पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह सागर को प्रदेश सचिव नियुक्त किया है। इस फैसले को रामपुर में आजम खान के गिरते वर्चस्व और अखिलेश के नए नेतृत्व की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
बिना आजम की मर्जी, सपा में हिला पत्ता
रामपुर में दशकों से यह परंपरा रही है कि आजम खान की सहमति के बिना पार्टी में कोई बड़ा फैसला नहीं होता था। लेकिन पिछले कुछ समय से स्थितियां बदल गई हैं। लोकसभा चुनाव में आजम खान की पसंद को दरकिनार कर मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को टिकट दिया गया था। अब संगठन के पदों पर भी अखिलेश यादव खुद फैसले ले रहे हैं। सुरेंद्र सिंह सागर की नियुक्ति इस बात का साफ संकेत है कि अखिलेश अब रामपुर में नए समीकरण (पीडीए) पर भरोसा कर रहे हैं।
सुरेंद्र सिंह सागर का संकल्प- 'सपा ही असली दलित हितैषी'
प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी संभालते ही सुरेंद्र सिंह सागर ने बसपा और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम की बसपा अब अपने सिद्धांतों से भटक गई है। सपा ही अब कांशीराम के विचारों को आगे बढ़ा रही है, जिससे दलित और पिछड़ा समाज अखिलेश यादव के साथ जुड़ रहा है। न केवल दलित, बल्कि भाजपा से नाराज ब्राह्मण समाज भी अब सपा के संपर्क में है।
आजम खान पर क्या है रुख?
आजम खान के सवाल पर सुरेंद्र सिंह सागर ने सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने आजम को पार्टी का आधार स्तंभ बताया और कहा कि पूरा पीडीए समाज उनके जेल से बाहर आने की दुआ कर रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि ये बयान केवल सम्मान तक सीमित हैं, जबकि पार्टी की कमान अब आजम के हाथों से खिसकती नजर आ रही है।
2027 का लक्ष्य- PDA को मजबूती
सागर ने अखिलेश यादव का आभार जताते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है। इसके लिए वे पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग को एकजुट कर संगठन का विस्तार करेंगे।