'विधानमंडल लोकतंत्र की नींव, अंतिम व्यक्ति की आवाज तक है पहुंचता', CM Yogi 86वें पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल

Edited By Purnima Singh,Updated: 22 Jan, 2026 01:26 PM

cm yogi attended the 86th presiding officers conference

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का मूल स्तंभ और सबसे प्रभावी मंच है जिसके माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज सरकार तक पहुंचती है। यहां 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन और विधायी...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का मूल स्तंभ और सबसे प्रभावी मंच है जिसके माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज सरकार तक पहुंचती है। यहां 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन और विधायी निकायों के सचिवों के 62वें सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के विधानमंडल न केवल कानून बनाने में बल्कि समावेशी और व्यापक विकास के लिए नीतियां बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

'विधानमंडल लोकतंत्र की मूलभूत इकाई है'
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘विधानमंडल लोकतंत्र की मूलभूत इकाई है। संविधान के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए, यह न केवल कानून बनाता है बल्कि समग्र विकास की योजना बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी कार्य करता है।'' उन्होंने कहा कि न्याय, समानता और भाईचारे के संवैधानिक मूल्य भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हैं और विधानमंडलों में उनकी सबसे सार्थक अभिव्यक्ति होती है। उन्होंने कहा, ‘‘विधानमंडल वह जगह है जहां न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाए जाते हैं, जहां एक समान समाज के निर्माण के लिए सरकारी नीतियां आकार लेती हैं, और जहां आम सहमति, संवाद और स्वस्थ बहस के माध्यम से भाईचारा परिलक्षित होता है।'' 

'भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत' 
आदित्यनाथ ने कहा कि भारत भाग्यशाली है कि उसके पास मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं जो दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोकतंत्र में, समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी अपने चुने हुए प्रतिनिधि के माध्यम से देश के सर्वोच्च सदन के सामने अपनी बात रख सकता है, और उस आवाज को पूरी ताकत से सुना जाता है।'' उन्होंने चुने हुए प्रतिनिधियों को इस प्रणाली का मुख्य स्तंभ बताया। गोरखपुर से पांच बार लोकसभा सदस्य के रूप में अपने अनुभव को याद करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि संसद ने उन्हें शासन, आचरण, प्रक्रियाओं और आम सहमति बनाने के मूल्यों को सिखाया। उन्होंने कहा कि राज्य विधानमंडल संसदीय प्रथाओं और प्रक्रियाओं से प्रेरणा लेकर अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकते हैं। 

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