गैस एजेंसियों पर लगीं लंबी कतारें, 25 दिन की बुकिंग लिमिट ने उड़ाई नींद; जानिए क्या है सरकार का वो सीक्रेट प्लान-बी

Edited By Anil Kapoor,Updated: 13 Mar, 2026 07:51 AM

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Lucknow News: मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की रसोई का बजट और सुकून बिगाड़ना शुरू कर दिया है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एलपीजी सिलेंडर की...

Lucknow News: मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की रसोई का बजट और सुकून बिगाड़ना शुरू कर दिया है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत देखी जा रही है। आलम यह है कि गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

क्या केरोसिन बनेगा सहारा?
अगले 10-12 दिनों में गैस की अस्थाई कमी की आशंका को देखते हुए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने इमरजेंसी प्लान पर काम शुरू कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकारी अब केरोसिन (मिट्टी का तेल) को एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में देख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर है। अगर एलपीजी की किल्लत बढ़ती है, तो उपभोक्ताओं को खाना पकाने के लिए केरोसिन मुहैया कराया जा सकता है।

केरोसिन की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण नहीं
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, केरोसिन की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं आएगी क्योंकि यह पेट्रोल और डीजल की रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान स्वाभाविक रूप से सह-उत्पाद (Natural By-product) के रूप में निकलता है। भारतीय रिफाइनरियों में इसका पर्याप्त उत्पादन होता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत बाजार में उतारा जा सकता है।

UP केरोसिन मुक्त से फिर केरोसिन युक्त की ओर?
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश को साल 2020 में केरोसिन मुक्त राज्य घोषित किया गया था। तब से राज्य में मिट्टी के तेल का आवंटन लगभग शून्य हो गया था:-
- 2020-21: 43,152 किलोलीटर आवंटन
- 2023-24: शून्य (0) आवंटन
लेकिन युद्ध के हालातों ने सरकार को अपनी पुरानी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

बुकिंग सीमा और मांग में गिरावट
गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए 25 दिनों की बुकिंग सीमा लागू कर दी गई है। इसके चलते आंकड़ों में भारी बदलाव आया है:-
- सामान्य मांग: 10 लाख सिलेंडर प्रतिदिन।
- वर्तमान मांग: 7.6 लाख सिलेंडर (बुकिंग सीमा लागू होने के बाद)।
- वर्तमान आपूर्ति: ओएमसी फिलहाल करीब 6.9 लाख सिलेंडर उपलब्ध करा पा रही हैं।

घबराएं नहीं, आपूर्ति पर्याप्त है: ऑयल कंपनियां
तनाव के बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने बयान जारी कर जनता से अपील की है कि वे घबराएं (Panic Buying) नहीं। कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के 4.85 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए वितरण नेटवर्क सुचारू रूप से काम कर रहा है। अनावश्यक रूप से सिलेंडर जमा ना करें, सप्लाई जारी रहेगी।

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