इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक केस की कार्यवाही पर रोक लगाई, नोटिस जारी; जानिए क्या कहा?

Edited By Pooja Gill,Updated: 25 Sep, 2025 11:44 AM

allahabad high court stays proceedings in triple talaq case

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन तलाक के एक मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए प्रतिवादी को नोटिस जारी किया है। यह मामला अमरोहा जिले के नौगवां सादत पुलिस थाना क्षेत्र का है...

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन तलाक के एक मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए प्रतिवादी को नोटिस जारी किया है। यह मामला अमरोहा जिले के नौगवां सादत पुलिस थाना क्षेत्र का है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने शाहिद रजा और दो अन्य की याचिका पर पारित किया, जिन्होंने संपूर्ण मुकदमे के साथ 22 जून, 2024 को दाखिल आरोप पत्र और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) द्वारा 10 जुलाई, 2025 को जारी समन को रद्द करने का अनुरोध करते हुए यह याचिका दायर की है।

वकील ने दी ये दलीलें 
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता मुस्लिम हैं और शिया समुदाय से आते हैं। इस समुदाय में मुस्लिम महिला (शादी पर संरक्षण के अधिकार) अधिनियम, 2019 की धारा 2(सी) के तहत परिभाषित तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, याचिकाकर्ता शाहिद रजा ने अपनी पत्नी (प्रतिवादी संख्या 2) को तीन तलाक दिया है। मुस्लिम कानून के तहत शिया समुदाय में तलाक के रूप में तीन तलाक स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दलील दी कि भारत में मुस्लिम दो मुख्य समुदायों- सुन्नी और शिया में बंटे हुए हैं और यह मामला केवल सुन्नी से जुड़ा है। चूंकि शिया तीन तलाक को मान्यता नहीं देते, इसलिए शुरुआत में ही इस बिंदु पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

अदालत ने ये कहा...
अदालत ने 18 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि इस मामले में विचार की आवश्यकता है। प्रतिवादी संख्या 2 को नोटिस जारी किया जाए और इस मामले को 12 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। प्रतिवादी तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल कर सकते हैं। अगली तिथि तक उक्त मामले में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी। 

इन धाराओं के तहत दाखिल हुई थी FIR 
उल्लेखनीय है कि आरोपियों के खिलाफ 2024 में अमरोहा के नौगवां सादत थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने), 504 (शांति भंग करने के इरादे से किसी का अपमान), 506 (आपराधिक धमकी) और मुस्लिम महिला (शादी पर संरक्षण के अधिकार) अधिनियम की धारा 3/4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 
 

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