Edited By Purnima Singh,Updated: 06 Mar, 2026 03:49 PM

उत्तर प्रदेश में रंगों के त्योहार होली पर सड़क सुरक्षा के आंकड़े भयावह बने रहे। बीते 48 घंटों के दौरान प्रदेशभर में हुए भीषण सड़क हादसों में 265 लोगों की मौत हो गई, जबकि 650 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड घायलों से...
UP News : उत्तर प्रदेश में रंगों के त्योहार होली पर सड़क सुरक्षा के आंकड़े भयावह बने रहे। बीते 48 घंटों के दौरान प्रदेशभर में हुए भीषण सड़क हादसों में 265 लोगों की मौत हो गई, जबकि 650 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड घायलों से भरे पड़े हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश दुर्घटनाओं की वजह शराब के नशे में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना रही।
लखनऊ और आसपास के जिलों में सबसे अधिक मौतें
राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में सबसे ज्यादा हादसों की जानकारी मिली। लखनऊ और सीतापुर में 9-9 मौतें, जबकि बहराइच और बाराबंकी में 8-8 लोगों की जान गई। अमेठी में 7, गोंडा में 6, रायबरेली में 7 और सुलतानपुर, श्रावस्ती व अंबेडकरनगर जैसे जिलों में भी कई परिवारों ने अपने प्रियजन खो दिए। अधिकांश दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों की भिड़ंत या अनियंत्रित होकर पेड़ और खंभों से टकराने के कारण हुईं।
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पूर्वांचल और कानपुर मंडल में भारी नुकसान
पूर्वांचल के गोरखपुर क्षेत्र में कुल 38 मौतें हुईं, जिनमें अकेले गोरखपुर जिले में 11 लोग मारे गए। देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी भयावह स्थिति रही। कानपुर और आसपास के जिलों में करीब 40 लोगों की मौत हुई। हरदोई जिले में सर्वाधिक 8 मौतें दर्ज की गईं, जबकि फर्रुखाबाद, इटावा और औरैया में भी कई हादसे हुए। प्रयागराज और वाराणसी समेत पूर्वांचल के 10 जिलों में 37 से अधिक लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई।
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पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्र का हाल
ब्रज क्षेत्र के आगरा, एटा, मथुरा और मैनपुरी में 19 मौतें हुईं, जिसमें एटा में सर्वाधिक 8 लोगों की जान गई। अलीगढ़ और हाथरस में 14 मौतें हुईं। पश्चिमी यूपी के बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में भी रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां कुल 21 लोगों की मौत हुई। बरेली मंडल और लखीमपुर खीरी में भी 24 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है।
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नशा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी मौतों की वजह
पुलिस प्रशासन का कहना है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद लोग यातायात नियमों की अनदेखी, बिना हेलमेट, तीन सवारी और शराब के नशे में वाहन चलाने जैसे जोखिम भरे कदम उठा रहे थे। कई जगहों पर देर रात हुई भिड़ंत और समय पर इलाज न मिलने के कारण मौतों का आंकड़ा और बढ़ा। प्रशासन ने कहा कि आगामी त्योहारों पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने के लिए हादसों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।