Edited By Anil Kapoor,Updated: 02 Feb, 2026 12:07 PM

Ghaziabad News: गाजियाबाद जिले में फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि एक ही पते पर बार-बार पासपोर्ट जारी किए जा रहे थे और कई आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल......
Ghaziabad News: गाजियाबाद जिले में फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि एक ही पते पर बार-बार पासपोर्ट जारी किए जा रहे थे और कई आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल हो रहा था। जब पुलिस ने जांच की, तो पता चला कि जिन पतों पर पासपोर्ट बनाए गए, वहां उन नामों के लोग कभी रहे ही नहीं। पुलिस ने इस मामले में डाक विभाग के एक कर्मचारी (डाकिया) समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे नेटवर्क में कुल 26 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
शिकायत से खुला राज
पूरा मामला तब सामने आया जब दिसंबर में दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने गाजियाबाद पुलिस को पत्र लिखकर कुछ आवेदनों को संदिग्ध बताया। उन्होंने जानकारी दी कि एक ही पते पर कई पासपोर्ट जारी हुए हैं और कई फॉर्म में एक ही मोबाइल नंबर दिया गया है। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
पते थे, लेकिन लोग नहीं
पुलिस जब दिए गए पतों पर पहुंची तो वहां कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, जिसके नाम पर पासपोर्ट जारी हुआ था. न तो पड़ोसियों को जानकारी थी और न ही वहां रहने का कोई सबूत मिला। इससे साफ हो गया कि पते फर्जी थे।
डाकिया बना सबसे अहम कड़ी
जांच में सामने आया कि स्थानीय डाकघर में तैनात डाकिया अरुण कुमार इस फर्जीवाड़े की बड़ी कड़ी था। आरोप है कि वह हर पासपोर्ट के बदले 2,000 रुपये लेकर उसे असली पते पर देने के बजाय सीधे गिरोह के लोगों को दे देता था। इस तरह पासपोर्ट डिलीवरी का आखिरी चरण भी गिरोह के कब्जे में था।
कैसे हुआ सौदा
पूछताछ में अरुण कुमार ने बताया कि प्रकाश सुब्बा और विवेक नाम के दो लोग उससे मिले थे। उन्होंने हर पासपोर्ट पर 2,000 रुपये देने का लालच दिया। धीरे-धीरे वह इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया और कई पासपोर्ट सीधे गिरोह तक पहुंचाता रहा।
26 लोगों पर केस दर्ज
पुलिस ने एक महिला समेत 26 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके नाम पर पासपोर्ट बने और वे भी जिन्होंने इस काम में मदद की। पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, बाकी की तलाश जारी है।
खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस मामले का संबंध किसी बड़े नेटवर्क या अवैध गतिविधियों से तो नहीं। क्योंकि पासपोर्ट का गलत इस्तेमाल मानव तस्करी, अवैध यात्रा या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में हो सकता है।
सिस्टम की खामियां उजागर
एक ही पते पर 22 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होना, सिस्टम की कमजोरियों की ओर इशारा करता है। अब सत्यापन और डिलीवरी प्रक्रिया को और सख्त करने की तैयारी है।
आगे क्या?
पुलिस यह पता लगा रही है कि ऐसे कितने पासपोर्ट जारी हुए और उनका कहां इस्तेमाल हुआ। गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है, इसकी भी तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।