Edited By Anil Kapoor,Updated: 12 Sep, 2025 01:50 PM

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। UPSC की तैयारी करने आए एक छात्र ने खुद ही अपने प्राइवेट पार्ट को काट डाला। छात्र का कहना है कि वह खुद को लड़का नहीं, बल्कि लड़की मानता है। इस दर्दनाक कदम के बाद...
Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। UPSC की तैयारी करने आए एक छात्र ने खुद ही अपने प्राइवेट पार्ट को काट डाला। छात्र का कहना है कि वह खुद को लड़का नहीं, बल्कि लड़की मानता है। इस दर्दनाक कदम के बाद छात्र की हालत बिगड़ गई और उसे गंभीर स्थिति में SRN हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है।
क्या है पूरा मामला?
छात्र अमेठी का रहने वाला है और प्रयागराज के नैनी इलाके में रहकर UPSC की तैयारी कर रहा है। मंगलवार को उसने खुद को बेहोश करने वाला इंजेक्शन (एनेस्थीसिया) लगाया और फिर सर्जिकल ब्लेड से अपने प्राइवेट पार्ट को काट दिया। इसके बाद उसने खुद ही मरहम-पट्टी की, लेकिन कुछ घंटों बाद अत्यधिक खून बहने और दर्द के कारण तबीयत बिगड़ गई। तब उसने मकान मालिक को बुलाया, जिसने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया।
छात्र का दावा: 'मैं लड़की हूं'
छात्र ने बताया कि भले ही मेरा शरीर लड़के जैसा है, लेकिन मेरा मन, बोलचाल और हावभाव लड़कियों जैसे हैं। मैं खुद को लड़का नहीं मानता। कई दिनों से मेरे मन में यह बात चल रही थी। इसी सोच ने उसे एक झोलाछाप डॉक्टर के संपर्क में ला दिया, जिसने उसे गलत सलाह दी। उसके बहकावे में आकर छात्र ने यह खतरनाक कदम उठाया।
परिवार की हालत
छात्र एक संभ्रांत किसान परिवार का इकलौता बेटा है। उसके पिता खेती करते हैं और मां गृहणी हैं। जैसे ही परिजनों को खबर मिली, वे अमेठी से तुरंत प्रयागराज पहुंचे। परिवार वाले शॉक में हैं और अब छात्र के इलाज और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
डॉक्टर का बयान: 'जान भी जा सकती थी'
डॉ. संतोष सिंह, सर्जन, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ने बताया कि छात्र संभवतः जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर से जूझ रहा है। यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। उसने बिना किसी विशेषज्ञ सलाह के जो किया, उसमें उसकी जान भी जा सकती थी। फिलहाल उसकी हालत अब ठीक है और काउंसलिंग करवाई जाएगी।
क्या होता है जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर?
यह एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी लैंगिक पहचान (Gender Identity) को लेकर उलझन में रहता है। कोई लड़का खुद को लड़की समझता है और लड़की खुद को लड़का। इसे Gender Identity Disorder (GID) कहा जाता है। यह स्थिति इलाज योग्य है, लेकिन इसके लिए समय, मेडिकल काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होती है।
जेंडर बदलने की प्रक्रिया
अगर कोई व्यक्ति जेंडर चेंज कराना चाहता है तो ये कदम जरूरी होते हैं:
- मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग (कम से कम 6-12 महीने तक)
- परिवार और खुद की सहमति
- हार्मोन थेरेपी और मेडिकल चेकअप
- कानूनी अनुमति और मेडिकल सर्जरी
- बिना इन सब प्रक्रियाओं के जेंडर चेंज की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है।