'जो आशुतोष की नाक काटेगा, उसे देंगे 21 लाख'- फलाहारी महाराज का बड़ा ऐलान, शंकराचार्य पर आरोप लगाने वाले की खैर नहीं

Edited By Anil Kapoor,Updated: 25 Feb, 2026 07:01 AM

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Mathura News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी की मुश्किलें अब बढ़ने लगी हैं। इस विवाद में अब मथुरा के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की एंट्री हो गई है। न्यास...

Mathura News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी की मुश्किलें अब बढ़ने लगी हैं। इस विवाद में अब मथुरा के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की एंट्री हो गई है। न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज ने शंकराचार्य का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक विवादित और बड़ा ऐलान किया है।

नाक काटने पर 21 लाख का इनाम
फलाहारी महाराज ने सीधे तौर पर आशुतोष ब्रह्मचारी को निशाने पर लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि जो कोई भी आशुतोष की नाक काटेगा, उसे 21 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि आशुतोष पांडे को जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाना चाहिए।

'शंकराचार्य का अपमान बर्दाश्त नहीं'
फलाहारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 125 करोड़ हिंदुओं की आस्था का प्रतीक और पूज्यनीय बताया। उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी एक अपराधी है और वह हिंदू कहलाने के लायक नहीं है। वह एक गौ हत्यारा है, जिसने पूज्य शंकराचार्य पर घिनौने आरोप लगाकर पूरे सनातन धर्म का अपमान किया है।
पूरे देश का सनातनी हिंदू इस कृत्य से आहत और अपमानित महसूस कर रहा है।

कौन हैं फलाहारी महाराज?
आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले फलाहारी महाराज अपने कड़े संकल्पों के लिए जाने जाते हैं। वे पिछले 4 वर्षों से अन्न का त्याग कर अनशन पर हैं। उनका संकल्प है कि जब तक मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से मस्जिद नहीं हटाई जाती, तब तक वे भोजन ग्रहण नहीं करेंगे। आज भी उनका यह अनशन जारी है।

गौरतलब है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था। इसके बाद से ही संत समाज और हिंदू संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। फलाहारी महाराज के इस बयान ने अब इस कानूनी लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है।

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