Edited By Anil Kapoor,Updated: 02 Jan, 2026 12:03 PM

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां बच्चों की पढ़ाई के लिए आई सरकारी किताबों को जरूरतमंद छात्रों में बांटने के बजाय कबाड़ी......
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां बच्चों की पढ़ाई के लिए आई सरकारी किताबों को जरूरतमंद छात्रों में बांटने के बजाय कबाड़ी को बेच दिया गया। जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
वीडियो वायरल होने से खुला राज
मामला नेवाजखेड़ा प्राथमिक विद्यालय का है। वायरल वीडियो में देखा गया कि एक कबाड़ी स्कूल परिसर से करीब छह बोरियों में भरी किताबें और अन्य सामान लेकर बाहर जा रहा है। इसी दौरान गांव के कुछ बच्चों और ग्रामीणों ने कबाड़ी को रोक लिया और बोरियां खुलवाईं। बोरियों में कक्षा 1 से 5 तक की नई किताबें मिलीं। बताया जा रहा है कि इन किताबों और सामग्री का वजन करीब दो क्विंटल था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब कुछ स्कूल के प्रधानाध्यापक की मौजूदगी में हुआ और किताबें जानबूझकर बेची गईं।
कबाड़ी ने भी मानी किताबें खरीदने की बात
मोहनलालगंज के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुशील कनौजिया ने बताया कि उन्होंने खुद स्कूल पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। ग्रामीणों और कबाड़ी दोनों के बयान दर्ज किए गए। कबाड़ी ने स्वीकार किया कि उसने पहले रेट तय कर किताबें खरीदी थीं, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद किताबें वापस कर दी गईं। बीईओ ने प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर पूछा है कि ये किताबें किस साल की थीं और स्कूल से कब-कब और क्या-क्या सामग्री बाहर भेजी गई।
प्रधानाध्यापक निलंबित
बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विपिन कुमार ने शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रधानाध्यापक रविंद्र गुप्ता को निलंबित कर दिया है। बीएसए ने कहा कि कई स्कूलों में आज भी बच्चों को पूरी किताबें नहीं मिल पा रही हैं, ऐसे में अतिरिक्त किताबों को कबाड़ में बेचना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने साफ कहा कि अगर जांच में किसी और की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में शिक्षा व्यवस्था
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में किताबों के वितरण और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ सरकार शिक्षा सुधार की बात कर रही है, वहीं इस तरह की लापरवाही बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।