संगम पर रचा गया इतिहास! 65 दिनों में 22 करोड़ श्रद्धालुओं की डुबकी, माघ मेले ने तोड़ दिए दुनिया के सारे रिकॉर्ड

Edited By Anil Kapoor,Updated: 15 Feb, 2026 09:17 AM

magh mela 2026 history made at sangam 220 million devotees took a holy dip in

Magh Mela 2026: आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर समूचा उत्तर प्रदेश 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गुंजायमान है। प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेला 2026 का आज अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व है। ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और...

Magh Mela 2026: आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर समूचा उत्तर प्रदेश 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गुंजायमान है। प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेला 2026 का आज अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व है। ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र मिलन स्थल पर डुबकी लगा रहे हैं।

संगम पर बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड
इस साल के माघ मेले ने इतिहास रच दिया है। मेला प्रशासन के अनुसार, इस पूरे आयोजन के दौरान अब तक 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं, जो अपने आप में एक विश्व कीर्तिमान है। सुबह 6 बजे तक ही 10 लाख लोग डुबकी लगा चुके थे। दिन खत्म होने तक यह आंकड़ा 1 करोड़ के पार जाने का अनुमान है।

अयोध्या में गूंजा 'बम-बम भोले'
राम नगरी अयोध्या आज शिवमय हो गई है। भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित नागेश्वर नाथ मंदिर में भक्तों का तांता लगा है।
आज शाम अयोध्या की सड़कों पर भगवान शिव की भव्य बारात निकाली जाएगी। पूरे शहर को जोन और सेक्टर में बांटकर अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।

ड्रोन और AI कैमरों का पहरा
बुलंदशहर के रामघाट और प्राचीन शिव मंदिरों में आधी रात से ही कांवड़ियों का जलाभिषेक जारी है। सुरक्षा के लिए प्रशासन तकनीक का सहारा ले रहा है। गंगा घाटों पर चप्पे-चप्पे पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है। मेला क्षेत्र में 150 से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाले कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने के लिए लगाए गए हैं।

प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
सुरक्षा को लेकर यूपी सरकार ने कड़े इंतजाम किए हैं। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 3.5 किलोमीटर लंबे घाट बनाए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों के साथ 400 सीसीटीवी कैमरे तैनात हैं ताकि एक भी अप्रिय घटना न हो।

अगले साल की प्रतीक्षा में विदा होंगे कल्पवासी
आज के अंतिम स्नान के साथ ही संगम की रेती पर बना 'तंबुओं का शहर' उजड़ने लगेगा। लाखों कल्पवासी अपनी एक महीने की कठिन साधना पूरी कर भारी मन से, लेकिन अगले साल फिर मिलने के संकल्प के साथ अपने घरों को लौटेंगे।

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