Edited By Anil Kapoor,Updated: 14 Feb, 2026 11:56 AM

Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को उस वक्त माहौल बेहद हल्का और खुशनुमा हो गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार के दौर के दो मजेदार किस्से सुनाए। मुख्यमंत्री ने इन किस्सों के जरिए पिछली सरकार की शिक्षा व्यवस्था और....
Lucknow News: उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को उस वक्त माहौल बेहद हल्का और खुशनुमा हो गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार के दौर के दो मजेदार किस्से सुनाए। मुख्यमंत्री ने इन किस्सों के जरिए पिछली सरकार की शिक्षा व्यवस्था और मंत्रियों की गंभीरता पर तीखा तंज कसा।
कमाल के मंत्री: बिस्मिल को बताया 'बिस्मिल्लाह खां'
मुख्यमंत्री योगी ने सदन को बताया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तत्कालीन शिक्षा मंत्री थे। योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि जब मंत्री जी को बताया गया कि आज राम प्रसाद बिस्मिल का शहादत दिवस है, तो उन्होंने बड़ी हैरानी से पूछा कि बिस्मिल्लाह खां को तो अभी कोई पुरस्कार मिला था, उन्हें फांसी क्यों दे दी गई? इतना ही नहीं, मंच पर पहुंचने के बाद भी मंत्री जी यही कहते रहे। जब नीचे बैठे लोगों ने उन्हें टोकने और सुधारने की कोशिश की, तो मंत्री जी ने उन्हें 'बीजेपी समर्थक' बताकर चुप करा दिया। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जिस प्रदेश का शिक्षा मंत्री ही बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां के बीच का अंतर न जानता हो, वहां नकल माफिया तो पनपेंगे ही।
जब अधिकारी ही नहीं पहचान पाए अपना 'मंत्री'
मुख्यमंत्री ने एक और किस्सा सुनाते हुए बताया कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब रेलवे स्टेशन पर उनकी मुलाकात राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों से हुई। उसी वक्त प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी वहां पहुंचे। योगी जी ने जब पास खड़े एक अधिकारी से पूछा कि क्या वह मंत्री जी के साथ आए हैं, तो अधिकारी ने पलटकर सवाल किया— 'कौन मंत्री?' बाद में खुद मंत्री जी ने स्वीकार किया कि वह पिछले 6 महीने से सचिवालय ही नहीं गए थे, इसलिए उनके विभाग के अधिकारी उन्हें पहचानते तक नहीं थे। सीएम योगी ने इसे पिछली सरकार की कार्यशैली और गंभीरता की कमी का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।