65 साल पहले मरी समझी गई बेटी जब 80 की उम्र में लौटी घर, हरदोई की 'मिठनी' की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान!

Edited By Anil Kapoor,Updated: 15 Feb, 2026 08:30 AM

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Hardoi News: 1961 का वह साल, जब हरदोई के टोलवा आट गांव में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी थी। 15 साल की एक मासूम लड़की 'मिठनी', जिसका गौना (विदाई) अगले महीने होना था, उसे डकैत बंदूक की नोक पर उठा ले गए थे। 6 दशक बीत गए, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन 80 साल की...

Hardoi News: 1961 का वह साल, जब हरदोई के टोलवा आट गांव में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी थी। 15 साल की एक मासूम लड़की 'मिठनी', जिसका गौना (विदाई) अगले महीने होना था, उसे डकैत बंदूक की नोक पर उठा ले गए थे। 6 दशक बीत गए, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन 80 साल की उम्र में जब वही बेटी अपने गांव वापस लौटी, तो पूरा इलाका फूट-फूट कर रो पड़ा।

वह खौफनाक रात: जब इज्जत लूटने आए थे डकैत
हरदोई मुख्यालय से 15 किमी दूर टोलवा आट गांव के बाहर एक छोटा सा पुरवा था। वहाँ रहने वाले बलदेव के घर पर अचानक 100 से ज्यादा डकैतों ने हमला बोल दिया। डकैत वहाँ धन-दौलत नहीं, बल्कि बलदेव की बेटी मिठनी को अगवा करने आए थे। विरोध करने पर पिता बलदेव और भाई शिवलाल को मरणासन्न कर दिया गया और 15 साल की मिठनी को डकैत उठा ले गए।

जंगल का सफर और अलीगढ़ में मिला नया जीवन
डकैत मिठनी को कई दिनों तक जंगलों में भटकते रहे और फिर अलीगढ़ में किसी को सौंप दिया। अलीगढ़ के दादों क्षेत्र के रहने वाले पहलवान सोहनलाल यादव को जब इस जुल्म का पता चला, तो उन्होंने अपने साथियों के साथ धावा बोलकर मिठनी को छुड़ाया। मिठनी सदमे में अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। सोहनलाल ने उससे विवाह कर उसे नया जीवन दिया। उनके 8 बच्चे हुए, लेकिन मिठनी के मन में अपने मायके की याद कभी धुंधली नहीं हुई।

यादों के धुंधले पन्नों से हकीकत तक
मिठनी को अपने पिता और भाई (शिवलाल व सूबेदार) के नाम याद थे। उसे याद था कि हरदोई का सकाहा शिव मंदिर, जहां साल में दो बार मेला लगता था। वह पुरवा, जहां से उसे उठाया गया था। मिठनी की छोटी बेटी सीमा यादव (नोएडा निवासी) अपनी मां की तड़प को समझती थी। सीमा ने ठान लिया कि वह अपनी अस्सी साल की मां को उनके अपनों से जरूर मिलाएगी।

जब 65 साल का इंतजार आंसुओं में बह गया
शुक्रवार को सीमा अपनी मां को लेकर बस से हरदोई पहुंचीं। सकाहा मंदिर देखते ही मिठनी की यादें ताजा हो गईं। गांव पहुंचकर जब भाई शिवलाल के घर का दरवाजा खटखटाया, तो पता चला कि पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन जब मिठनी ने अपनी पहचान बताई, तो घर में कोहराम मच गया।
 

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