Edited By Anil Kapoor,Updated: 08 Jan, 2026 12:04 PM

Lucknow News: उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक अहम चेतावनी सामने आई है। अगर उन्होंने तय समयसीमा के भीतर एक जरूरी औपचारिकता पूरी नहीं की, तो फरवरी में मिलने वाली उनकी सैलरी रुक सकती है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि......
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक अहम चेतावनी सामने आई है। अगर उन्होंने तय समयसीमा के भीतर एक जरूरी औपचारिकता पूरी नहीं की, तो फरवरी में मिलने वाली उनकी सैलरी रुक सकती है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों का वेतन रोक दिया जाएगा। दरअसल, यूपी सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से अपलोड करें। इसके लिए अंतिम तारीख 31 जनवरी 2026 तय की गई है। शासनादेश में साफ लिखा है कि जो कर्मचारी इस तारीख तक अपनी संपत्ति की जानकारी दर्ज नहीं करेंगे, उन्हें जनवरी महीने का वेतन फरवरी में नहीं दिया जाएगा।
मुख्य सचिव के आदेश से विभागों में हलचल
यह आदेश प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की ओर से जारी किया गया है। इसके बाद से सभी सरकारी विभागों में हलचल मच गई है। शासन ने सभी विभागाध्यक्षों, कार्यालय प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों से समय पर संपत्ति विवरण भरवाना सुनिश्चित करें। इसे सिर्फ औपचारिक आदेश नहीं, बल्कि सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
8.74 लाख कर्मचारियों पर लागू होगा नियम
शासनादेश के अनुसार यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत लागू की गई है। इस नियम के मुताबिक हर सरकारी कर्मचारी को हर साल अपनी अर्जित चल और अचल संपत्ति की जानकारी सरकार को देना जरूरी है। अब इस पूरी प्रक्रिया को मानव संपदा पोर्टल से जोड़ दिया गया है, ताकि संपत्ति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहे और पारदर्शिता बनी रहे। प्रदेश में इस समय करीब 8.74 लाख सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी, राजस्व कर्मचारी, सचिवालय और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित संपत्ति का पूरा विवरण देना होगा। इसमें शामिल हैं—
- जमीन और मकान
- फ्लैट
- वाहन
- बैंक जमा
- बीमा
- शेयर और अन्य निवेश
नोडल अधिकारी और DDO की बढ़ी जिम्मेदारी
इस आदेश के बाद नोडल अधिकारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों (DDO) की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। शासन ने कहा है कि—
नोडल अधिकारी नियमित रूप से पोर्टल की समीक्षा करेंगे। DDO यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन कर्मचारियों का विवरण अपलोड नहीं है, उनका वेतन रोका जाए। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि इस बार किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। पहले कई बार समयसीमा बढ़ा दी जाती थी, लेकिन इस बार वेतन से सीधा जुड़ाव कर सख्ती दिखाई जा रही है।
कर्मचारी संगठनों ने जताई परेशानी
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कुछ कर्मचारियों को तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में तैनात कर्मचारियों को। हालांकि शासन का दावा है कि मानव संपदा पोर्टल को पहले से ज्यादा आसान और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है।जरूरत पड़ने पर विभागीय स्तर पर कर्मचारियों की मदद के निर्देश भी दिए गए हैं।
कैसे भरें संपत्ति विवरण
अधिकारियों के मुताबिक—
- मानव संपदा पोर्टल पर लॉगिन करें
- 'संपत्ति विवरण' सेक्शन में जाएं
- जरूरी जानकारी भरकर सबमिट करें
- सबमिट करने के बाद उसकी पावती या रसीद सुरक्षित रखें
- समय रहते प्रक्रिया पूरी करने वाले कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, लेकिन लापरवाही भारी पड़ सकती है।