कानपुर सेंट्रल बैंक चोरी मामला: 23 दिनों में 2.15 करोड़ के जेवर गायब होने के बाद उलझी पुलिस, अब लॉकर बनाने वाली कंपनी से होगी पूछताछ

Edited By Mamta Yadav, Updated: 06 Apr, 2022 01:33 PM

kanpur police entangled after crore jewelery was stolen from 7 lockers

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के लाकर से जेवरात चोरी होने के मामले में पुलिस की चुनौती और कठिन हो गई है। क्योंकि बैंक प्रबंधन लाकर से जेवरात चोरी होने से इन्कार कर रहा है, मगर एक के बाद एक लगातार चौथी घटना के सामने आने के बाद...

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के लॉकर से जेवरात चोरी होने के मामले में पुलिस की चुनौती और कठिन हो गई है। क्योंकि बैंक प्रबंधन लाकर से जेवरात चोरी होने से इन्कार कर रहा है, मगर एक के बाद एक लगातार चौथी घटना के सामने आने के बाद पुलिस भी सोच में पड़ गई है। इसी बैंक में 23 दिनों के अंदर सात ग्राहकों के लॉकरों से 2.15 करोड़ के गहने गायब होने के मामले से हड़कंप मच गया है। ऐसे में फीलखाना पुलिस ने लाकर बनाने वाली कंपनी पर अपनी जांच केंद्रित की है।

बता दें कि कानपुर पुलिस द्वारा पड़ताल की जा रही है कि कहीं उसी नंबर की दूसरी चाबी का प्रयोग तो लाकर खोलने के लिए नहीं किया गया। इसीलिए लाकर से जुड़ी जानकारियां कंपनी से मांगी हैं। इंस्पेक्टर फीलखाना वीर सिंह ने बताया कि कराचीखाना स्थित सेंट्रल बैंक के चौथे लाकर से 27 लाख के जेवर चोरी होने के मामले सामने आए हैं। यह बड़ा उलझा हुआ मामला है। ऐसे में पुलिस लाकर बनाने वाली कंपनी पर जांच ध्यान केंद्रित कर रही है।

इंस्पेक्टर के मुताबिक उनकी पड़ताल में सामने आया है कि बड़ी से बड़ी कंपनी एक निश्चित सीमा तक ही चाबियों के नंबर तैयार करती हैं। लाखों लाकर बिक्री होने की स्थिति में निर्माता पुराने नंबरों पर ही चाबियां ढालने लगती हैं। क्योंकि हर लाकर के लिए नया चाबी नंबर का सांचा तैयार करना संभव नहीं है। संभव है कि लाकर निर्माता कंपनी के किसी कर्मचारी को उसी नंबर की चाबी के नंबर मिल गए हैं तो इसीलिए यह घटनाएं हुई। उन्हें जब यह पता चला तो उन्होंने लाकर निर्माता कंपनी से कुछ जानकारी मांगी हैं। हालांकि जांच में क्या निकलेगा अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

9 बैंक कर्मचारियों के दर्ज हुए बयान
इंस्पेक्टर ने बताया कि मंजू भट्टाचार्य वाली घटना में अब तक नौ बैंक कर्मचारियों व प्रकरण से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें बैंक की लापरवाही सामने आई है। चेस्ट रूम का भी एक लाकर है और वहां के कर्मचारी बिना इंट्री के लाकर आपरेट करते हैं। यह भी जानकारी मिली है कि कई कर्मचारी तो लाकर रूम में जाकर खाना तक खाते हैं। ऐसे में लाकर रूम की सुरक्षा को लेकर बैंक की लापरवाही सामने आई है।

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