Edited By Ramkesh,Updated: 10 Jan, 2026 02:07 PM

आज हम इंटरनेट के माध्यम से दुनिया से जुड़े हुए हैं। सब कुछ अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं सुन सकते हैं यहां तक की लोग जॉब से जुड़ी जानकारी भी ऑनलाइन लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऑनलाइन जॉब के चक्कर में सब कुछ लुटा देते हैं। दरअसल, बिहार पुलिस ने साइबर...
यूपी डेस्क: आज हम इंटरनेट के माध्यम से दुनिया से जुड़े हुए हैं। सब कुछ अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं सुन सकते हैं यहां तक की लोग जॉब से जुड़ी जानकारी भी ऑनलाइन लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऑनलाइन जॉब के चक्कर में सब कुछ लुटा बैठता हैं। दरअसल, बिहार पुलिस ने साइबर ठगी का एक हैरान कर देने वाले मामले का खुलासा किया है। जिसने पुलिस के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया है। ठगों ने निःसंतान दंपतियों और बेरोजगार युवाओं की भावनाओं को निशाना बनाते हुए ठगी का एक नया तरीका अपनाया, जिसे वे “ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस” का नाम दे रहे थे।
इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विसेज के झांसे में फंसा युवक
बिहार के एक युवक ने ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विसेज नाम से ऐड देखा। उसे ये जॉब लकी ड्रा जैसा लगा। ऐसे ही जब 27 साल के मुकेश को इसके बारे में पता चला, तो उसने अप्लाई कर दिया। कुछ दिनों बाद उसका सिलेक्शन हो गया। डॉक्यूमेंट्स बने, एग्रीमेंट हुआ, सब कुछ ऑनलाइन भेज दिया गया। फिर रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ₹15–16 हज़ार मांगे गए ,जो मुकेश ने दे दिए। टाइमलाइन बताई गई मीटिंग करवाई जाएगी और काम पूरा होते ही ₹15–16 लाख देने का लालच दिया गया। इसके बाद अलग-अलग बहानों से ₹20–25 हज़ार और निकलवा लिए गए। और फिर अचानक मुकेश को ब्लॉक कर दिया गया।
फर्जीवाड़ा झूठे दावों और लालच पर आधारित था- पुलिस
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा फर्जीवाड़ा झूठे दावों और लालच पर आधारित था। आरोपी फोन कॉल के जरिए लोगों को यह भरोसा दिलाते थे कि वे निःसंतान महिलाओं को गर्भवती कराने की विशेष तकनीक जानते हैं। इसके बदले में लोगों को 10 लाख रुपये तक कमाने का लालच दिया जाता था। कहा जाता था कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया में शामिल होता है तो उसे मोटी रकम दी जाएगी। इस झांसे में आकर कई लोग रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक जमा कर देते थे।
जल्दी पैसे कमाने का सपना देखने वाले को गैंग बना रहा था निशाना
जांच में सामने आया है कि गिरोह खासतौर पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे या जल्दी पैसे कमाने का सपना देखने वाले लोगों को निशाना बनाता था। ठग फोन पर इसे पूरी तरह “लीगल और सुरक्षित” बताकर भरोसा जीतते थे। इतना ही नहीं, निःसंतान महिलाओं को भी झांसे में लेकर उनसे अलग-अलग चरणों में पैसे वसूले जाते थे। कई महिलाएं मानसिक दबाव और सामाजिक डर के कारण शिकायत तक नहीं कर पाईं।
साइबर ठगी का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नवादा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवा गांव में साइबर ठगी का अड्डा चल रहा है। पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान के निर्देश पर गठित टीम ने छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें एक नाबालिग है, जबकि दूसरे की पहचान रंजन कुमार के रूप में हुई है।
कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और संदिग्ध चैट्स मिले
पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और संदिग्ध चैट्स मिले हैं। साइबर सेल अब इनकी गहन जांच कर रही है। एसपी अभिनव धीमान ने बताया कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें लोगों की भावनाओं के साथ गंभीर धोखाधड़ी की गई है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है, वहीं गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।