Edited By Purnima Singh,Updated: 10 Mar, 2026 01:17 PM

उत्तर प्रदेश से एक महत्वपूर्ण शिक्षा संबंधी खबर सामने आई है। योगी सरकार राज्य के मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने की योजना पर काम कर रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद मदरसों में पढ़ाई जाने वाली कामिल और फाजिल कक्षाओं की परीक्षाएं...
Lucknow News : उत्तर प्रदेश से एक महत्वपूर्ण शिक्षा संबंधी खबर सामने आई है। योगी सरकार राज्य के मदरसों को राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने की योजना पर काम कर रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद मदरसों में पढ़ाई जाने वाली कामिल और फाजिल कक्षाओं की परीक्षाएं संबंधित विश्वविद्यालयों के माध्यम से आयोजित कराई जा सकेंगी।
सरकार इस योजना को लागू करने के लिए Uttar Pradesh State Universities Act, 1973 में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। संशोधन के बाद मदरसों को भी डिग्री कॉलेजों की तरह आसपास के राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्धता मिल सकेगी।
छात्रों को मिलेंगे बेहतर रोजगार के अवसर
राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को भी विश्वविद्यालय के छात्रों की तरह रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के बाद मदरसों की डिग्री को अधिक व्यापक मान्यता मिलने की संभावना है।
वर्तमान में मदरसों के छात्रों को सीमित क्षेत्रों में ही अवसर मिल पाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह पहल शुरू की है, ताकि उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सके।
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उच्च शिक्षा विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव
इस योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। विभागीय स्तर पर जांच के बाद इसे शासन के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। शासन की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जाएगा और मंजूरी मिलने पर सरकार इसका शासनादेश जारी करेगी।
कामिल और फाजिल डिग्री की मान्यता
मदरसों में दी जाने वाली कामिल डिग्री को स्नातक (ग्रेजुएशन) और फाजिल डिग्री को परास्नातक (पोस्ट ग्रेजुएशन) के समकक्ष माना जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि इन डिग्रियों को विश्वविद्यालय प्रणाली से जोड़कर विद्यार्थियों को अधिक मान्यता और सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिल सकें।
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प्रदेश में करीब 25 हजार मदरसे
उत्तर प्रदेश में लगभग 25 हजार मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 16,500 मदरसे शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं, जबकि लगभग 560 मदरसों को सरकारी अनुदान मिलता है। Darul Uloom Deoband प्रदेश का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक मदरसा माना जाता है। हाल ही में मदरसों की मान्यता को लेकर Allahabad High Court ने भी एक अहम फैसला दिया था, जिसमें कहा गया कि बिना मान्यता के मदरसा चलाना अवैध नहीं है, लेकिन ऐसे संस्थान सरकारी अनुदान पाने के पात्र नहीं होंगे।