Up Election 2022: जगदीशपुर में चुनाव दिलचस्प, BJP को अपनो से भी करना पड़ेगा मुकाबला

Edited By Mamta Yadav,Updated: 29 Jan, 2022 08:46 PM

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कांग्रेस के गढ़ के तौर पर विख्यात रही अमेठी की जगदीशपुर सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार सुरेश पासी को मौजूदा विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के साथ साथ क्षेत्र में भाजपा समर्थकों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता...

अमेठी: कांग्रेस के गढ़ के तौर पर विख्यात रही अमेठी की जगदीशपुर सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार सुरेश पासी को मौजूदा विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के साथ साथ क्षेत्र में भाजपा समर्थकों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।

भाजपा की शुक्रवार को जारी उम्मीदवारों की सूची में जगदीशपुर से मौजूदा विधायक सुरेश पासी के नाम की घोषणा होते ही उनके खिलाफ कुछ भाजपा समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया। सोशल मीडिया पर पासी के विरोध में स्वर मुखर होने लगे। पिछले दिनों राज्य मंत्री को कई गांव में विरोध झेलना पड़ा था जिसकी वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फेसबुक पर ऐसी तमाम पोस्ट देखी जा सकती हैं जिनमें राज्यमंत्री के खिलाफ लोग मोर्चा खोले हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अमेठी जिले की जगदीशपुर विधानसभा में यह चुनाव दिलचस्प होने के आसार हैं। भाजपा को इस बार अपनी सीट बचाने की चुनौती है तो वहीं कांग्रेस ने अपना गढ़ वापस पाने के लिए पुरजोर कोशिश करेगी।

इस सीट पर 2002 से 2012 तक लगातार कांग्रेस का कब्जा था लेकिन 2017 में भाजपा ने कांग्रेस के किले को भेद दिया। भाजपा के सुरेश पासी ने कांग्रेस के राधेश्याम को 16600 वोट से हरा दिया था। कांग्रेस के किले को ढहाने के एवज में भाजपा ने सुरेश पासी को राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया। 2022 में कांग्रेस ने विजय पासी को प्रत्याशी बनाया है जो 2012 में समाजवादी पार्टी (सपा) के सिंबल पर चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के राधेश्याम से शिकस्त खा गए थे।      

गौरतलब है कि जगदीशपुर सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा नौ बार जीत हासिल की है। 1962 में पहले ही चुनाव में कांग्रेस यहां काबिज हो गयी और इंद्रपाल सिंह विधायक बने। इसके बाद 1974 में कांग्रेस के राम सेवक धोबी विधायक बने। फिर 1980, 1985, 1989 और 1991 में रामसेवक लगातार चार बार विधायक रहे। इसके बाद 2002 और 2007 में भी रामसेवक ने यहां कांग्रेस का परचम लहराया। 2012 में भी यहां से कांग्रेस के राधेश्याम विधायक बने जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार यह सीट भाजपा के खाते में आयी।
 

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