हाईकोर्ट परिसर में बिना अनुमति दबिश, हुआ हंगामा...दो दरोगा और एक सिपाही निलंबित

Edited By Pooja Gill,Updated: 21 Jan, 2026 11:09 AM

unauthorized raid in the high court premises uproar ensues

Lucknow News: यूपी की राजधानी में गो तस्करी के एक मामले में आरोपी महिला की तलाश में सोमवार दोपहर दो दरोगा और एक सिपाही हाईकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने एक अधिवक्ता के चैंबर में घुसकर महिला को...

Lucknow News: यूपी की राजधानी में गो तस्करी के एक मामले में आरोपी महिला की तलाश में सोमवार दोपहर दो दरोगा और एक सिपाही हाईकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने एक अधिवक्ता के चैंबर में घुसकर महिला को पकड़ने की कोशिश की और कथित तौर पर धमकाया। इस पर वहां मौजूद वकीलों ने विरोध किया और पुलिसकर्मियों को घेर लिया। बाद में विभूतिखंड थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया। इस घटना के बाद तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और डीसीपी ने उन्हें निलंबित कर दिया।

क्या है पूरा मामला
माल के ऊंचाखेड़ा निवासी सुशील कुमार ने 14 जनवरी को काकोरी थाने में अमीनाबाद के मो. वासिफ के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था। जांच के दौरान आमिना खातून का नाम भी सामने आया, जिसके बाद उसे भी आरोपी बना दिया गया। सोमवार को काकोरी थाने के दरोगा उस्मान खान, लाखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह को सूचना मिली कि आमिना हाईकोर्ट में अपने रिश्तेदार और अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी से मिलने आई है। तीनों पुलिसकर्मी पर्ची बनवाकर हाईकोर्ट परिसर में दाखिल हुए और गुफरान सिद्दीकी के चैंबर नंबर 515, ब्लॉक-सी पहुंच गए।

जैसे ही पुलिस ने आमिना को पकड़ने की कोशिश की, वहां वकील इकट्ठा हो गए। वकीलों ने हाईकोर्ट परिसर में इस तरह की कार्रवाई का विरोध किया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच गई। इसके बाद विभूतिखंड थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों पुलिसकर्मियों को वहां से बाहर ले जाकर मामला शांत कराया।

पुलिस पर दर्ज हुई एफआईआर
इस मामले में अधिवक्ता सज्जाद हुसैन और हाईकोर्ट के निबंधक (सुरक्षा) शैलेंद्र कुमार ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि पुलिस ने कोर्ट में प्रवेश के लिए गलत जानकारी दी और बिना अनुमति अधिवक्ता के चैंबर में घुसकर दबिश दी। जांच में यह भी सामने आया कि जिस एफआईआर का हवाला देकर पुलिस कोर्ट में दाखिल हुई थी, वह मामला हाईकोर्ट की सुनवाई सूची में था ही नहीं। इसके बाद पुलिस एडवोकेट जनरल या सीएससी कार्यालय जाने के बजाय सीधे अधिवक्ता के चैंबर पहुंच गई।

इन धाराओं में केस दर्ज
तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक अतिचार, धमकी देना, जानबूझकर अपमान, धोखाधड़ी और गलत जानकारी देने जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी
नियम के अनुसार, हाईकोर्ट परिसर में किसी की गिरफ्तारी या तलाशी के लिए न्यायालय की अनुमति जरूरी होती है। पुलिसकर्मी यदि महिला के कोर्ट परिसर से बाहर आने का इंतजार करते तो विवाद नहीं होता। नियमों की अनदेखी और बिना अनुमति कार्रवाई करने के कारण तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!