Edited By Ramkesh,Updated: 11 Mar, 2026 01:31 PM

केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ी...
यूपी डेस्क: केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ी कथित आपत्तिजनक सामग्री को लेकर सामने आया था।
सरकार विशेषज्ञ समिति गठित करती तो यह बेहतर कदम होता
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि केंद्र सरकार सीधे एनसीईआरटी को निर्देश देने के बजाय पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करती तो यह बेहतर कदम होता।
आठवीं की किताब को लेकर उठा विवाद
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी कथित आपत्तिजनक सामग्री के मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद 26 फरवरी को अदालत ने इस पुस्तक के भविष्य में किसी भी प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
सभी कक्षाओं की पुस्तकों की होगी जांच
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ने केवल आठवीं कक्षा ही नहीं बल्कि सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने के लिए एनसीईआरटी को निर्देशित किया है। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जाएगा और विशेषज्ञों की जांच के बिना कोई भी सामग्री प्रकाशित नहीं की जाएगी।
NCERT निदेशक ने मांगी माफी
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि एनसीईआरटी के निदेशक ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांग ली है। केंद्र ने कहा कि इस मामले में व्यवस्थागत सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।