Edited By Ramkesh,Updated: 12 Apr, 2026 04:59 PM

राजधानी लखनऊ के सरकारी महकमे में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभाग की पारदर्शिता और स्थानांतरण (Transfer) नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो दशक यानी 20 सालों से एक ही स्थान पर जमीं अवर अभियंता शालिनी यादव अब जांच के घेरे में हैं। उनके...
लखनऊ (अश्वनी कुमार सिंह): राजधानी लखनऊ के सरकारी महकमे में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभाग की पारदर्शिता और स्थानांतरण (Transfer) नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो दशक यानी 20 सालों से एक ही स्थान पर जमीं अवर अभियंता शालिनी यादव अब जांच के घेरे में हैं। उनके खिलाफ दीर्घकालीन तैनाती के साथ-साथ भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग की गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है।
प्रमुख आरोप जिन पर टिकी है जांच की सुई
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप विभाग के भीतर चल रहे ‘नेक्सस’ की ओर इशारा करते हैं।
ट्रांसफर नीति का उल्लंघन
वर्ष 2006 से अब तक एक ही जगह पर तैनाती, जो सरकारी नियमों और पारदर्शिता के दावों को खुली चुनौती दे रही है।
गुणवत्ता से समझौता
सरकारी निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी और नियमों को ताक पर रखकर काम कराने के आरोप।
ठेकेदारों से सांठगांठ
सबसे गंभीर आरोप ठेकेदारों के साथ ‘कमीशन आधारित’ रिश्तों का है। पक्षपात पूर्ण तरीके से बिल पास करने और आर्थिक लाभ लेने की बात कही गई है। हालांकि इस पर ये साबित हो रही है कि ऐसे अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर सरकार की साख को खराब कर रहे हैं।
क्या होगी कार्रवाई?
शिकायत में मांग की गई है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरित (Transfer) किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो सके। बड़ा सवाल यह है कि क्या लखनऊ के इस ‘वीआईपी’ सिस्टम में तैनात अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर रसूख के आगे यह शिकायत भी पुरानी फाइलों में दब जाएगी?