25 दुर्लभ गिद्धों ने एक साथ तड़प-तड़प कर तोड़ा दम, जहरीले कुत्ते बने काल... बरेली के IVRI में होगा महा-खुलासा

Edited By Anil Kapoor,Updated: 09 Apr, 2026 03:21 PM

lakhimpur kheri 25 rare vultures died in agony together

Lakhimpur Kheri: दुधवा बाघ अभयारण्य (डीटीआर) के बफर जोन की भीरा रेंज में 25 गिद्धों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) को गिद्धों के आंतरिक अंगों के नमूने जांच के वास्ते भेजे गए हैं।...

Lakhimpur Kheri: दुधवा बाघ अभयारण्य (डीटीआर) के बफर जोन की भीरा रेंज में 25 गिद्धों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) को गिद्धों के आंतरिक अंगों के नमूने जांच के वास्ते भेजे गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। दुधवा बफर जोन की उप निदेशक कीर्ति चौधरी ने बताया कि लुप्तप्राय प्रजाति के 25 गिद्ध बफर जोन के अंतर्गत आने वाले सेमराई गांव के एक खेत में मृत पाए गए थे। इन गिद्धों में से अधिकांश हिमालयन ग्रिफिन प्रजाति के माने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उसी खेत में 5 अन्य गिद्ध अचेत अवस्था में मिले थे। उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।

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चौधरी ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि उसी खेत में कुछ दूरी पर मृत कुत्ते भी बरामद किए गए, ऐसे में आशंका है कि गिद्धों की मौत कुत्तों के अवशेष खाने से हुई है। उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सकों के एक पैनल ने 23 गिद्धों का पोस्टमार्टम किया। डीटीआर के क्षेत्रीय निदेशक एवं मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच. राजमोहन के निर्देश पर दो मृत गिद्ध और 23 गिद्धों के विसरा आगे की जांच एवं विश्लेषण के लिए बरेली स्थित आईवीआरआई भेजे गए हैं। हालांकि, पोस्टमार्टम से अवशेष में मिले जहर की प्रकृति का स्पष्ट पता नहीं चल सका है, लेकिन यह पुष्टि हुई है कि गिद्धों की मौत उसी स्थान से बरामद मृत कुत्तों के अवशेष खाने के कारण हुई।

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पोस्टमार्टम पैनल के सदस्य डॉ. दया शंकर ने बताया कि अंत्य परीक्षण में प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि मृत कुत्तों में कोई जहरीला पदार्थ मौजूद था, जिसे खाने के कारण 25 गिद्धों की मौत हो गई और पांच अन्य बीमार पड़ गए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय निदेशक के निर्देशानुसार 23 गिद्धों के आंतरिक अंग और दो मृत गिद्ध आईवीआरआई भेजे गए हैं, ताकि विशेषज्ञों द्वारा किए जाने वाले वैज्ञानिक विश्लेषण से मृत्यु के सटीक कारण और जहरीले पदार्थ की प्रकृति का पता लगाया जा सके। गिद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति हैं और इन्हें पक्षियों की गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया है।

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