अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चुनाव 25 अक्टूबर को होगा, महंत नरेन्द्र गिरि की मौत के बाद से पद है रिक्त

Edited By Ramkesh,Updated: 19 Oct, 2021 06:48 PM

the election of the president of the akhara parishad will be held on october 25

साधु संतो की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चुनाव 25 अक्टूबर को होगा। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि की 20 सितंबर को संदिग्ध अवस्था में मौत हो गयी थी। उनका शव बाघम्बरी गद्दी मठ के एक कमरे में पंखे से लटकता मिला था। उनके...

प्रयागराज: साधु संतो की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चुनाव 25 अक्टूबर को होगा। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि की 20 सितंबर को संदिग्ध अवस्था में मौत हो गयी थी। उनका शव बाघम्बरी गद्दी मठ के एक कमरे में पंखे से लटकता मिला था। उनके निधन के बाद अध्यक्ष का पद रिक्त है। अखाड़ा परिषद के सूत्रों ने बताया कि प्रयागराज स्थित तपोनिधि श्री निरंजनी अखाड़ा ने दारागंज में सभी 13 अखाड़ों के संतो की बैठक 25 अक्टूबर को बुलाई है। इसी दिन परिषद के अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी। अखाडा परिषद को तीनो बैरागी वैष्णव अखाड़ो के बैठक में शामिल होने पर संदेह है। तीनो अखाड़े परिषद के अध्यक्ष रहे नरेन्द्र गिरि की षोडशी में शामिल नहीं हुए थे। 

बैरागी वैष्णव सम्प्रदाय में दिगम्बर अखाड़े के श्रीमहंत राम किशोर शास्त्री ने बताया कि तीनो अखाड़े (श्री दिगम्बरी अनि अखाड़ा, श्री निर्वानी अनि अखाड़ा और श्री पंच निर्मोही अनि अखाड़ा)को महंत नरेन्द्र गिरि की षोडशी में शामिल होने का कोई आमंत्रण नहीं मिला था। इस कारण तीनो अनि अखाडो से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ था। उनके निधन का समाचार सुनकर सभी वहां पहुंचे थे। मान सम्मान और स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वैसे हम नरेन्द्र गिरि जी के पास आते-जाते थे, वो अलग बात थी लेकिन बिना आमंत्रण के कही भी नहीं जाया जा सकता है। 

उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर को परिषद के अध्यक्ष पद चुनाव के लिए अभी किसी प्रकार की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होने कहा कि हमे न/न तो षोडशी और नही बैठक की सूचना है। बैरागी अखाड़ा हमेशा अखाड़ा परिषद को समर्थन देते आ रहे थे लेकिन इन्होने हमेशा दोयम दर्ज का व्यवहार किया। वैरागी वैष्णव से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत ज्ञानदास को थोडे समय तक काम करने का मौका मिला। लोगों ने शांति से उन्हे काम नहीं करने दिया। ज्ञानदास जी के समय में अखाड़ा परिषद को ख्याति मिली। उसके बाद नरेन्द्र गिरि को 2015 में उज्जैन के कुंभ में अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित किया गया। उन्होने बताया कि उस समय भी अखाडा परिषद का हम लोगों ने समर्थन किया था। उन्होने बताया कि एक पंथ, एक सम्प्रदाय के अलग होने पर एकता नहीं रह जाती , वह भंग हो जाता है। जब तक सभी 13 अखाड़े एक साथ नहीं मिलते तब तक आधिकारिक रूप से अखाड़ा परिषद नहीं बनता है। 

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