Edited By Anil Kapoor,Updated: 08 Feb, 2026 11:51 AM

UP Politics News: यूपी में अगड़ा बनाम पिछड़ा को लेकर चल रही सियासी घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर अपनी पुरानी लेकिन आजमाई हुई रणनीति की ओर लौटती दिख रही है...बीएसपी सुप्रीमो मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सवर्ण मतदाताओं, खासकर...
UP Politics News: यूपी में अगड़ा बनाम पिछड़ा को लेकर चल रही सियासी घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर अपनी पुरानी लेकिन आजमाई हुई रणनीति की ओर लौटती दिख रही है...बीएसपी सुप्रीमो मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सवर्ण मतदाताओं, खासकर ब्राह्मण वोट बैंक को साथ लाने की ठोस तैयारी में जुट गई हैं...पार्टी का मानना है कि यदि अपने पारंपरिक बेस वोटर के साथ सवर्ण समाज का समर्थन मिल जाए, तो सत्ता की राह एक बार फिर आसान हो सकती है।
हाल के दिनों में मायावती के बयानों पर नजर डालें तो साफ संकेत मिलता है कि ब्राह्मण समाज उनके राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में है... लगातार सार्वजनिक मंचों से वे ब्राह्मणों के सम्मान, सुरक्षा और हितों की बात कर रही हैं... बीते शनिवार हुई अहम बैठक में भी मायावती ने ब्राह्मण समाज के योगदान और उनके अधिकारों का जिक्र करते हुए पार्टी नेताओं को इस दिशा में सक्रिय रहने के निर्देश दिए।
बीएसपी नेतृत्व को ये भी याद है कि अतीत में सवर्णों के सहयोग से ही पार्टी ने सत्ता का स्वाद चखा था... साल 2007 के विधानसभा चुनाव में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के नारे के साथ मायावती ने दलित, पिछड़े और सवर्ण समाज को एक मंच पर लाकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी… अब करीब दो दशक बाद एक बार फिर उसी सामाजिक समीकरण को दोहराने की कोशिश हो रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती अपने कोर वोट बैंक के साथ-साथ सवर्ण समाज को जोड़कर एक व्यापक सामाजिक गठबंधन खड़ा करना चाहती हैं...और यही वजह है कि ब्राह्मणों को लेकर उनका रुख लगातार नरम नजर आ रहा है...पार्टी के भीतर भी इस रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बीएसपी के बड़े नेता जिलों का दौरा शुरू करेंगे... इन दौरों में खासतौर पर ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली लोगों से संवाद, बैठकें और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे... पार्टी का उद्देश्य जमीनी स्तर पर भरोसा कायम करना और ये संदेश देना है कि बीएसपी सिर्फ एक वर्ग की नहीं, बल्कि सर्व समाज की पार्टी है...और वही पुराना नारा है ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’।
कुल मिलाकर, 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मायावती ने ब्राह्मणों को केंद्र में रखकर बिगुल फूंक दिया है.... सवाल बस इतना है कि क्या 2007 का सर्वजन प्रयोग एक बार फिर बीएसपी को सत्ता के शिखर तक पहुंचा पाएगा... या बदलते राजनीतिक हालात में ये रणनीति नई चुनौतियों से जूझती नजर आएंगी...इसका जवाब आने वाले महीनों की राजनीति में साफ होता नजर आएगा।