Edited By Ramkesh,Updated: 31 Jan, 2026 02:43 PM

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के नए नियम को लेकर मचे बवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। इसके बाद इसे लेकर अब सियासत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने...
लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के नए नियम को लेकर मचे बवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। इसके बाद इसे लेकर अब सियासत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। इसे लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने मायावती पर हमला बोला है।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, मायावती जी ने यूजीसी के नियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है? बीजेपी ने ऐसा करवाया उसका प्रमाण है कि एक दिन में 12 लाख लोगों ने पोस्ट को देखा । इनके ज्यादातर पोस्ट औसतन 50 हज़ार लोग देखते हैं और बहुत ही कम पोस्ट हैं जहां एक या दो लाख लोगों ने देखा है। क्या इनके दलित समर्थक चाहे जितना अंध भक्त हों, सवर्ण जिसका विरोध कर रहे हों उन्ही के साथ हो जायेंगे। पूरी बीजेपी IT प्रकोष्ठ ताकत लगा दिया है । अब भी क्या प्रमाण की जरूरत है जानने का कि मुंह में अंबेडकर और दिल में कमल है । हो सकता है कोई मजबूरी हो लेकिन यह साबित हो गया है ।
आप को बता दें कि बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का बचाव करते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध ‘‘बिल्कुल भी उचित नहीं है''। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था।
मायावती ने कहा, ‘‘देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा सरकारी कॉलेज और निजी विश्वविद्यालयों में समता समिति बनाने के नए नियम के कुछ प्रावधानों का केवल जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग ही विरोध कर रहे हैं, इसे भेदभाव और षड्यंत्र मानना कतई उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, “पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए था, जिससे सामाजिक तनाव पैदा नहीं होता। सरकार और सभी संस्थानों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।”बसपा नेता ने कहा, “ऐसे मामलों में दलित और पिछड़े वर्ग के लोग भी इन वर्गों के स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में नहीं आएं, जो आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं। इन वर्गों के लोगों को सावधान रहना चाहिए।
गौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है, ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम पर रोक लगा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 19 फरवरी को करेगी।